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Tuesday, March 17, 2026

निलांद्री के हौसलों के सामने हार गई लाचारी, पेश की सफलता की मिसाल

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कठिन समय में भी कायम रखी उम्मीद, संयम से पूरा किया जुनून
अदाणी स्किल डेवलपमेंट सेंटर में पूरा किया सिलाई प्रशिक्षण का कोर्स

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रायगढ़ / मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंख से कुछ नहीं होता, हौसले से उड़ान होती है।“ कविता की इन पंक्तियों को क्षेत्र की एक दिव्यांग महिला ने अपने जोश, जूनून और जिद से सच कर दिखाया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश के नवगठित जिले सक्ति स्थित डभरा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत चंदली में रहने वाली 40 वर्षीय निलांद्री बचपन से ही पैरों से चल पाने में असमर्थ है, लेकिन निलांद्री के इस जूनून को हौसले का पंख देने में मदद की अदाणी फाउंडेशन ने। जी हाँ! उसके इस हौसले और काम करने के जज्बे को देखते हुए रायगढ़ एनर्जी जनरेशन लिमिटेड (आरईजीएल) के

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सामाजिक सहभागिता कार्यक्रम के तहत अदाणी फाउंडेशन ने उसे अदाणी स्किल डेवलपमेंट सेंटर में तीन माह के सिलाई प्रशिक्षण कोर्स में प्रवेश दिलाया। इस दौरान उसने कभी भी अपनी दिव्यांगता को अपने सपनों के बीच नहीं आने दिया। रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखण्ड में अदाणी फाउंडेशन द्वारा आसपास के ग्रामों में आजीविका विकास कार्यकमों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और जीवन स्तर में सुधार लाने के लिए विभिन्न परियोजनाओं का संचालन किया जा रहा है।

दिव्यांगता के बावजूद पेश की अनूठी मिसाल

दरअसल, गांव के जरूरतमंद परिवार से आने वाली निलांद्री ने कक्षा 9वीं तक की पढ़ाई की है, लेकिन साक्षर होने के बाद भी उसकी सफलता की रहें इतनी आसान नहीं थीं। बचपन से ही पैरों से दिव्यांग होने के बाद उसे कहीं से भी सहायता नहीं मिल रही थी, परंतु इस दिव्यांगता के बावजूद निलांद्री ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर क्षेत्र की महिलाओं और युवाओं के समक्ष अनूठी मिसाल पेश की है।

निलांद्री ने कठिन परिस्थितियों के बारे में बताते हुए कहा,” दिव्यांगता के बाद मेरे पिता भी पांव के जख्मों की वजह से कार्य कर पाने में असमर्थ हो गए थे। इससे हमारी आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गयी थी। पूरे परिवार का बोझ दो बड़े किसान भाइयों पर आ गया, किन्तु वे भी असहाय थे। इसी बीच मुझे आरईजीएल और अदाणी फाउंडेशन के स्व-सिलाई प्रशिक्षण के बारे में पता चला, जिसमें प्रवेश लेकर मैंने सिलाई सीखी और आज मैंने स्वयं का व्यवसाय शुरू किया। फाउंडेशन ने आज मुझे हाई स्पीड सिलाई मशीन भी प्रदान की है, जिससे मैं अपने व्यवसाय को और आगे बढ़ा कर ज्यादा आय अर्जित कर सकती हूँ। इस पुनीत कार्य के लिए मैं कृतज्ञ हूँ और आभार प्रकट करती हूँ।”

अदाणी फाउंडेशन ने दिलाई व्यावसायिक इलेक्ट्रिक सिलाई मशीन

निलांद्री की कड़ी मेहनत एवं व्यवसाय के प्रति उसकी सच्ची लगन को देखते हुए अदाणी फाउंडेशन द्वारा उसे सोमवार को एक व्यवसायिक इलेक्ट्रिक सिलाई मशीन प्रदान की गई। जिससे वह अपने व्यवसाय का विस्तार कर पाएगी और शादी, त्योहार, नवरात्रि एवं अन्य विशेष अवसरों में ग्राहकों से प्राप्त ऑर्डर को समय पर पूरा करने के साथ ही अधिक आमदनी भी अर्जित कर सकेगी। इस अवसर पर ग्राम पंचायत चंदली की सरपंच श्रीमती सुशीला निषाद, ग्राम पंचायत छोटे भंडार की सरपंच सतरुपा चौहान, ग्राम पंचायत बड़े भंडार की सरपंच मोहरमती सिदार, प्राथमिक आयुष चिकित्सा केंद्र बड़े भंडार के डॉक्टर देवांगन एवं ग्रामीण बैंक के ब्रांच मैनेजर उपस्थित थे।

इस अवसर पर ग्राम पंचायत चंदली की सरपंच श्रीमती सुशीला निषाद ने निलांद्री को गाँव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा स्रोत और आदर्श बताया। उन्होंने कहा, “इसकी कर्तव्यनिष्ठा की जितनी तारीफ की जाए वो कम होगी। प्रतिकूल परिस्थतियों में भी इसने हार न मानते हुए न केवल अपने सपने को पूरा किया बल्कि अब ये अपने परिवार की आर्थिक मदद भी कर रही है। रायगढ़ एनर्जी जनरेशन लिमिटेड के सीएसआर कार्यक्रम के अंतर्गत अदाणी फाउंडेशन के द्वारा आसपास के ग्रामों की महिलाओं को आजीविका विकास से जोड़ने, कौशल क्षमता मे वृद्धि और उनको सशक्त बनाने का यह प्रयास सराहनीय है।”

स्वयं के बाद अपने गांव की युवतियों और महिलाओं को बना रही आत्मनिर्भर

अदाणी स्किल डेवलपमेंट सेंटर से कोर्स पूरा होने के बाद निलांद्री ने घर के छोटे से कमरे से ही एक पुरानी सिलाई मशीन और कुल पांच हजार रुपये की छोटी जमा पूंजी से अपने व्यवसाय की शुरुआत की। वर्तमान में वह सलवार सूट, डिजाईनर ब्लाउज, पिकू फाल, स्कूल बैग, मास्क, लहंगा और शर्ट पैंट इत्यादि बनाने के कार्य कुशलतापूर्वक कर रही है। इस कार्य से उसे प्रतिमाह चार से पांच हजार रुपये की आमदनी हो रही है, जिससे वह अपने परिवार और बूढ़े माता-पिता का खर्च वहन कर रही है। उसने गांव की करीब एक दर्जन लड़कियों और महिलाओं को बिना फीस लिए सिलाई की ट्रेनिंग भी देकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।

अदाणी फाउंडेशन की यह पहल न सिर्फ नीलांद्री के हौसले को बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने की तरफ अग्रसर है, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका संवर्धन तथा अधोसंरचना के गुणवत्तायुक्त कई कार्य संचालित हैं।

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