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Thursday, March 19, 2026

थर्मल पावर भारत की एनर्जी की रीढ़ है, उर्जा उत्पादन के साथ ऐश प्रबंधन की जिम्मेदारी भी हैः एमडी मिश्रा…जिंदल इंस्टीटृयूट ऑफ पॉवर टेक्नॉलॉजी में राख से संपत्ति तक निपटान और उपयोग विषय पर हुआ नेशनल कांफ्रेंस

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रायगढ़। जिंदल इंस्टीटृयूट ऑफ पॉवर टेक्नॉलॉजी तमनार में ऐश युटिलाइजेशन पर नेशनल कांफ्रेंस का आयोजन किया गया। वर्कशॉप को संबोधित करते हुए जेपीएल तमनार के एमडी प्रदीप्तो कुमार मिश्रा ने कहा कि थर्मल पावर दशकों से भारत की एनर्जी पावर की रीढ़ रहा है। इससे उद्योगों को शक्ति मिलती है, बुनियादी ढांचे का विकास होता है और देश के आर्थिक विकास का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि उर्जा उत्पादन के साथ ही इसके उप उत्पादों फ्लाई ऐश और बॉटम ऐश के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी आती है।

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जेपीएल के एमडी प्रदीप्तो कुमार मिश्रा ने कहा कि देश में हर साल लगभग 280 मिलियन टन फ्लाई ऐश का उत्पादन होता है। जिसके कारण फ्लाई ऐश उत्पादकों में भारत दुनिया में सबसे बड़े उत्पादकों में से एक बन जाता है। एमडी श्री मिश्रा ने कहा कि उद्योगों के प्रयासों  और सरकारी नीतियों के कारण भारत में फ्लाई ऐश का उपयोग बहुत बढ़ गया है, हाल के वर्षों में 90 प्रतिशत उपयोग के करीब पहुंच गया है। हालांकि केंद्र सरकार ने 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश के उपयोग को अनिवार्य किया है। उन्होंने कहा कि बिजली संयंत्रों के लिए यह आदेश चुनौती और अवसर दोनों है। उन्होंने कहा कि राख को केवल निपटान की आवश्यकता वाले अपशिष्ट उत्पाद के रूप में नहीं देखा जा सकता बल्कि इसे एक मूल्यवान संसाधन के रूप में पहचाना जा रहा है।

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इन कार्यो में हो रहा ऐश का उपयोग
एमडी प्रदीप्तो कुमार मिश्रा ने नेशनल कांफ्रेंस में बताया कि ऐश का उपयोग अब बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि ऐश का उपयोग सीमेंट बनाने, सड़क निर्माण व तटबंध बनाने में किया जा रहा है, इसके अलावा बुनियादी ढांचे के विकास में भी ऐश का उपयोग हो रहा है साथ ही खदानों के भराव और भूमि सुधार में भी ऐश का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जब ऐश का उपयोग प्रभावी ढंग से किया जाए तो फ्लाई ऐश टिकाउ बुनियादी ढांचे के विकास और चक्रीय अर्थव्यवस्था प्रथाओं में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।
ऐश के उपयोग के लिए इनकी होगी महत्वपूर्ण भूमिका
एमडी प्रदीप्तो कुमार मिश्रा ने कहा कि राख के उपयोग के उच्च स्तर को प्राप्त करने के लिए लगातार तकनिकी नवाचार, परिचालन में सुधार और हितधारकों के बीच सहयोग की आवश्यकता होती है। श्री मिश्रा ने कहा कि बिजली उपयोगकर्ताओं, सीमेंट बनाने वाली कंपनियों, नीति निर्माताओं, अनुसंधान संस्थानों की इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि इस सम्मेलन से राख प्रबंधन से जुड़ी तकनिकी बाधाओं को दूर करने के लिए व्यवहारिक समाधान का अवसर मिलेगा।
ऐश हैंडलिंग प्लांट कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं: ईडी वेंकट रेड्डी
नेशनल कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए जेपीएल तमनार के ईडी जी वेंकट रेड्डी ने कहा कि संयंत्र संचालकों के लिए कई परिचालन चुनौतियां बनी हुई है, ऐश हैंडलिंग प्लांट कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि अपघर्षक सामग्री,  बड़ी मात्रा में राख और लंबी दूरी को संभालना, पाइप लाइन में घिसाव, घोल के परिवहन जैसे मुद्दों पर निरंतर तकनीकी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी और एआई परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकती है। श्री रेड्डी ने कहा एआई सक्षम निगरानी और पूर्वानुमानित रख रखाव, उपकरण की विपफलता के शुरूआती संकेतों का पता लगा कर सिस्टम के प्रदर्शन को अनुकूलित कर सकता है, राख हैंडलिंग सिस्टम की विश्वसनीयता में काफी सुधार कर सकता है।
जेपीएल कर रहा ऐश मैनेजमेंट के लिए बेहतर प्रयास
जेपीएल के ईडी जी वेंकट रेड्डी ने बताया कि जेपीएल तमनार द्वारा ऐश मैनेजमेंट के लिए बेहतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया जीईएचओ पंपों के साथ ही उच्च सांद्रता वाले स्लरी सिस्टम का उपयोग करके राख का पाइप लाइन से परिवहन किया जा रहा है। यह पाइप लाइन पानी की कम खपत के साथ ही लंबी दूरी के परिवहन को सरल बना रही है। उन्होंने बताया कि खदान बैक फिलिंग के लिए भी फ्लाई ऐश  का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ऐश से एसेट्स तक की यात्रा के लिए न केवल तकनीक बल्कि दृष्टि, सहयोग और प्रतिबद्धता की भी आवश्यकता होती है।

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