शशांक शर्मा बोले – इंदिरा गांधी ने 1975 में संविधान को बंधक बनाया था
प्रेस वार्ता में कांग्रेस को घेरते हुए कहा अतीत की काली छाया से मुक्त नहीं हो सकती कांग्रेस
रायगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता में शशांक शर्मा ने कहा 21 महीने तक लोकतंत्र कैद था, जेपी-वाजपेयी समेत हजारों नेता जेल में डाले गए
रायगढ़:- भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे काली अवधि 25 जून 1975 को लगे आपातकाल के 49 वर्ष पूर्ण होने पर छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष एवं राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त शशांक शर्मा ने रायगढ़ में प्रेस वार्ता कर कांग्रेस की तानाशाही को उजागर किया। 21 महीने के दौरान आपातकाल का काला से
शशांक शर्मा ने बताया कि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक का 21 महीने का समय स्वतंत्र भारत का सबसे अलोकतांत्रिक काल था। तत्कालीन राष्ट्रपति फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की धारा 352 के अधीन आपातकाल लगा दिया था। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इसे भारतीय इतिहास का सर्वाधिक काला अवधि निरूपित किया ।भाजपा नेता ने कहा सत्ता बचाने के लिए लोकतंत्र की हत्या से गुरेज नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि श्रीमती इंदिरा गांधी के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ देश भर में भयंकर आक्रोश था। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा राजनारायण की चुनाव याचिका पर इंदिरा गांधी के खिलाफ फैसला आते ही उनके हाथ से सत्ता निकलती दिखी। तब 25 जून 1975 की रात आपातकाल घोषित कर लोकतंत्र को निलंबित कर दिया गया। आपातकाल लगते ही स्वयंसेवकों और गैर-कांग्रेसी नेताओं की गिरफ्तारी शुरू हो गई। लोकनायक जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली, जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार, सुशील मोदी, रामविलास पासवान समेत हजारों नेता रातों रात गिरफ्तार किए गए। अविभाजित मध्यप्रदेश से भी सभी विपक्षी नेता जेल में डाल दिए गए।मीडिया पर सबसे बड़ा प्रहार हुआ। 3801 अख़बार ज़ब्त किए गए, 327 पत्रकार मीसा कानून में बंद, 290 अख़बारों के सरकारी विज्ञापन बंद। The Times और The Guardian के संवाददाता भारत से निकाले गए। 51 विदेशी पत्रकारों की मान्यता छीन ली गई। शशांक शर्मा ने कहा कि ‘सेक्युलरिज्म और सोशलिज्म’ शब्द आपातकाल से पहले संविधान में थे ही नहीं। जब राष्ट्रपति, न्यायपालिका, संसद सभी निष्प्रभावी कर दिए गए, तब चुपके से इन शब्दों को प्रस्तावना में डाल दिया गया।कांग्रेस की मनोवृत्ति आज भी आपातकाल जैसी बताते हुए
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में अभिनेत्री का घर ढहाना, अर्णव गोस्वामी पर अत्याचार, पश्चिम बंगाल में हत्याएं-बलात्कार, छत्तीसगढ़ में ट्वीट रीट्वीट पर केस – ये सब आपातकाल वाली कांग्रेस की मूल वृत्ति है। “बांटो और राज करो कांग्रेस का मूलमंत्र रहा है। आम जनता को इतिहास याद कराते हुई
शशांक शर्मा ने कहा कि आज हम जिस आज़ादी की हवा में सांस ले रहे हैं, यह आज़ादी हमने कांग्रेस से लड़कर हासिल की है। यह दूसरी आज़ादी है। भारतीय संविधान और लोकतंत्र अटल-आडवाणी-नानाजी जैसे राष्ट्रवादियों का हासिल किया लोकतंत्र है। लोकनायक जेपी का कमाया लोकतंत्र है।
आपातकाल 1977 में खत्म हुआ, लेकिन उसकी मनोवृत्ति वाले तत्व आज भी मौजूद हैं। अगर इतिहास याद नहीं रखेंगे तो उसे बार-बार दोहराने पर विवश होंगे। इसलिए हर वर्ष 25 जून को ‘काला दिवस’ के रूप में याद करना जरूरी है।प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से ,महामंत्री विकास केड़िया,प्रदेश कार्य समिति सदस्य सुभाष पांडे,महापौर जीवर्धन चौहान, उपाध्यक्ष अरुण कातोरे,अशोक अग्रवाल जिला सह प्रवक्ता,अनुपम पाल प्रदेश संयोजक सांस्कृतिक प्रकोष्ठ ,संजय अग्रवाल मण्डल अध्यक्ष,दुर्गा देवांगन कार्यक्रम सह संयोजक,साहिल मनिहारी सहित भाजपा के पदाधिकारियों की मौजूदगी रही।


