पखवाड़े भर बाद भी नहीं हुई ठोस कार्रवाई, बगमुड़ा और छोटेमुड़ा तालाब का मामला
सफाई के नाम पर खानापूर्ति का आरोप, नागरिकों ने मांगी जांच
रायगढ़। पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा अनियमिताओं के लिये शुमार रहने वाले घरघोड़ा नगर पंचायत अभी भी अपने कारनामो से बाज नही आ रही है यहां के वार्ड क्रमांक 10-12 स्थित बगमुड़ा और छोटेमुड़ा तालाब में जलकुंभी हटाने को लेकर किए गए दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। पखवाड़े भर पहले नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा जलकुंभी हटाने की कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई दे रही है। जिसमें अवकाश का लाभ लेते हुए संबंधित ठेकेदार एक तालाब से निकालकर दूसरे में तालाब तथा उसके इर्द गिर्द डंप कर रहा है।

दरअसल तालाब में गंदे पानी के कारण जलकुंभी उत्तपन्न होता है। यह तालाब को पूरी तरह से अपने चपेट में ले लेता है। स्थानीय लोगों के अनुसार संबंधित ठेकेदार द्वारा एक तालाब से निकाली गई जलकुंभी को पूरी तरह नष्ट या निर्धारित स्थान पर निस्तारित करने के बजाय दूसरे तालाब तथा तालाब के आसपास के क्षेत्रों में डाल दिया जा रहा है। इससे जलकुंभी की समस्या खत्म होने के बजाय एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंच रही है। ग्रामीणों और वार्डवासियों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई से तालाबों की सफाई का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।

गौरतलब है कि इस मामले को लेकर पूर्व में भी नईदुनिया ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित होने के बाद नगर पंचायत के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) ने कार्रवाई का आश्वासन देते हुए जलकुंभी हटवाने का दावा किया था। इसके बावजूद करीब पखवाड़े भर बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा है। जबकि पखवाड़े भर बाद फिर से वहीं कृत्य को दोहराया जा रहा है मानो उन्हें प्रशासन तथा कार्रवाई का कोई भय नही हो।

स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि जलकुंभी हटाने के कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए और निकाली गई जलकुंभी के वैज्ञानिक एवं स्थायी निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि दोनों तालाबों को अतिक्रमण और जलकुंभी की समस्या से मुक्त किया जा सके। इन परिस्थितियों के मद्देनजर घरघोड़ा के प्रबुद्धजन प्रतिनिधि मंडल सोमवार को लिखित उच्च अधिकारियों के समक्ष शिकायत दर्ज कराएंगे।
बीमारी फैलने का भय
ठेकेदार को मिल रहे संरक्षण के कारण एक तलाब की जल कुम्भी निकाल कर दूसरे तलाब में डंप कर पहाड़ बनाया जा रहा है जिसके सड़ने से उसकी बदबू के फैलने से आस पास मोहल्लों में बीमारी फैलने की आशंका बनी रहेगी
तालाबों के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा
तालाब में जलकुंभी तेजी से फैलने वाला जलीय खरपतवार है, जो तालाबों में आक्सीजन की मात्रा कम कर जलजीवों और जलस्रोतों को प्रभावित करता है। ऐसे में इसे एक स्थान से हटाकर दूसरे स्थान पर डालना समस्या को और बढ़ा सकता है। यह परिस्थिति बगमुड़ा और छोटेमुड़ा तालाब में जलकुंभी की समस्या से नजर आ रहा है। जबकि दोनों तालाब के संरक्षण के लिए लाखो रूपये स्वीकृति क्या गया है पर दुर्भाग्य है कि राजनीतिक दुर्भावना का परिणाम है कि छोटे मुडा तलाब का कार्य आज तक रुका हुआ है ।
ठेकेदार को मिल रहा है संरक्षण
सबसे बड़ा सवाल है कि ठेकेदार को आखिर किनका संरक्षण मिल रहा है जो अपनी मनमानी पर उतर आया है कहि ना कहि नप के अधिकारियों की लापरवाही का खमियाजा आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है।

