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Sunday, April 12, 2026

नारी शक्ति वंदन अधिनियम, राजनीति में नए युग की शुरुवात:- गोमती साय

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घर को स्वर्ग बनाने वाली महिलाएं राजनीति में आकर देश को स्वर्ग बनाएगी:- रायमुनी भगत

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रायगढ़ :- महिला आरक्षण विधेयक को लेकर जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व सांसद पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने कहा नारी शक्ति वंदन अधिनियम, एक नए युग की दस्तक है। महिला आरक्षण से राजनीति में भी महिलाओं का वर्चस्व स्थापित होगा। ईमानदारी से घर परिवार चलाने वाली महिलाएं राजनीति में स्थान सुनिश्चित होने से अब ईमानदारी से देश चलाएगी।मौजूदा स्थिति में महिलाओं की भागीदारी 16% है जो इस अधिनियम के लागू होने के बाद 33% जो जाएगी। जिससे लोकसभा राज्यसभा और विधान सभा में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। गोमती साय ने कहा जैसे शक्ति के बिना शिव अधूरे थे और सृष्टि के संचालन में कठिनाई थी इसे मातृ शक्ति स्वरूपा सती पार्वती के सहयोग से दूर किया गया। इस विधेयक के लिए सभी महिलाओं की ओर से गोमती साय ने प्रधान मंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया।जशपुर विधायक राय मुनि भगत ने कहा तीन दशकों से यह विधेयक लंबित रहा लेकिन इच्छा शक्ति के अभाव की वजह से यह पास नहीं हो पाया ।मोदी जी की दृढ़ इच्छा शक्ति की वजह से तीन दशकों से लंबित बिल संसद के नए भवन से पास हो पाया। महिलाओं के विभिन्न रूपों पत्नी बेटी मां की व्याख्या करते हुए राय मुनि भगत न कहा दुर्गा काली सरस्वती के रूप में मातृ शक्ति को पूजा जाता है। मोदी जी के विकसित भारत की कल्पना को नारी शक्ति वंदन अधिनियम पूरा करेगा। पत्थलगांव भाजपा विधायक गोमती साय ने कहा भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 एक युगांतरकारी कदम के रूप में सामने आया है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का यह प्रावधान केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नीति निर्माण को अधिक समावेशी, संवेदनशील और प्रभावी बनाने की दिशा में एक ठोस पहल है। इसका शीघ्र और प्रभावी क्रियान्वयन महिलाओं को “नीति की लाभार्थी” से “नीति की निर्माता” बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा और यही विकसित भारत के निर्माण की आधारशिला बनेगा।उन्होंने कहा इस अधिनियम के लागू होने का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि शासन की प्राथमिकताओं में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। जब निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा, जल और स्वच्छता जैसे विषय अधिक प्राथमिकता के साथ सामने आते हैं। स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण का अनुभव पहले ही यह दर्शा चुका है कि महिला प्रतिनिधित्व से नीतियां अधिक जन-केंद्रित और प्रभावी बनती हैं। अब यही प्रभाव संसद और विधानसभाओं के स्तर पर दिखाई देगा, जिससे विकास की दिशा अधिक संतुलित और समावेशी होगी। इस परिवर्तन की पृष्ठभूमि पिछले एक दशक में तैयार की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण को एक व्यापक और जीवन चक्र आधारित दृष्टिकोण से देखा गया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान ने सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाया है और लड़‌कियों की माध्यमिक स्तर की नामांकन दर 80.2 प्रतिशत तक पहुंची है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं, जो बेटियों के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। उच्च शिक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी में लगातार वृद्धि इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करती है।स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के माध्यम से 4.27 करोड़ से अधिक महिलाओं को पोषण सहायता प्राप्त हुई है। पोषण 2.0 के अंतर्गत 14 लाख से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों के जरिए 8.97 करोड़ लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंच रही हैं। इन प्रयासों का परिणाम यह है कि मातृ मृत्यु अनुपात में उल्लेखनीय कमी आई है, जो महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है। आर्थिक सशक्तिकरण इस परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण आधार बना है। प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 32.29 करोड़ महिलाएं बैंकिंग प्रणाली से जुड़ी हैं, जिससे वित्तीय समावेशन को नई गति मिली है। मुद्रा योजना के 68 प्रतिशत ऋण महिलाओं को प्राप्त हुए हैं, जबकि 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित होकर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। लखपति दीदी और नमो ड्रोन दीदी जैसी पहलों ने महिलाओं को पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़ाकर तकनीकी और उद्यमिता के क्षेत्र में सशक्त किया है। महिलाओं के जीवन में गरिमा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए भी व्यापक कदम उठाए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत महिलाओं को घरों का स्वामित्व मिला है, उज्ज्वला योजना ने स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराया है, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन ने दैनिक जीवन की कठिनाइयों को कम किया है। इन पहलों ने महिलाओं को समय, स्वास्थ्य और सम्मान तीनों स्तरों पर सशक्त बनाया है। इन सभी प्रयासों ने मिलकर एक ऐसा मजबूत आधार तैयार किया है, जिस पर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन और अधिक परिणामकारी सिद्ध होगा। जब संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, तो वे इन योजनाओं को और प्रभावी बनाने के साथ-साथ नई नीतियों के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगी। इससे शासन अधिक उत्तरदायी, पारदर्शी और संवेदनशील बनेगा। यह अधिनियम केवल एक नारी शक्ति वंदन अधिनियम वैधानिक व्यवस्था नहीं है, बल्कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को गति देने वाला एक निर्णायक कदम है। जब महिलाएं नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ेंगी, तो विकास की प्रक्रिया अधिक समावेशी, संतुलित और टिकाऊ बनेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्पष्ट दृष्टिकोण रहा है कि महिला नेतृत्व वाला विकास ही भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन उसी दृष्टि को साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है, जो आने वाले समय में भारत के लोकतंत्र और विकास मॉडल को और सशक्त बनाएगा। वरिष्ठ भाजपा नेत्री शीला तिवारी के मंचस्थ अतिथियों का व्यक्तिगत परिचय दिया वही महिला मोर्चा अध्यक्ष मधुलता पटेल ने मंच संचालन किया और पूनम पटेल सोलंकी ने आभार व्यक्त किया।

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प्रेसवार्ता में नजर आई महिला आरक्षण की झलक

प्रवक्ता बब्बल पांडे ने जानकारी देते हुए कहा इस प्रेस वार्ता में महिला आरक्षण की झलक नजर आई। प्रेस वार्ता के दौरान स्टेज़ में केवल महिलाएं ही बैठी।गोमती साय विधायक पत्थलगांव,रायमुनी भगत विधायक जशपुर, शिखा गवेल जिला पंचायत अध्यक्ष,मधुलता पटेल जिलाध्यक्ष महिला मोर्चा,

रेखा महामिया महामंत्री महिला मोर्चा रायगढ,शीला तिवारी, सुषमा खलखो, पूनम पटेल सोलंकी, त्रिवेणी डहरे, सावित्री मिश्रा, लक्ष्मी पटेल, दीपमाला गुप्ता, लक्ष्मी विश्वास की।मौजूदगी रही।

सुर साम्राज्ञी आशा भोशले के निधन पर मंच ने मौन धारण कर दी श्रद्धांजलि

आशा भोसले के निधन पर मंचस्थ अतिथियों ने दो मिनट का मौन धारण करते हुए शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजली अर्पित की। गोमती साय ने कहा देशवासियों में अब गीत की आशा अब कौन जगाएगा। आशा जी ने अपनी सुरीली आवाज से देश की बड़ी आबादी को प्रभावित किया। इस मंच से सुर साम्राज्ञी को भावपूर्ण अश्रुपूरित श्रद्धांजली दी गई।

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