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Friday, February 13, 2026

जिंदल फाउण्डेशन, जेपीएल तमनार का मशरूम उत्पादन, आय अर्जन का एक सशक्त माध्यम…क्षेत्रीय ग्रामीण महिलाएॅ आर्थिक सशक्तिकरण की ओर

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रायगढ़, जशपुर, कोरबा, जांजगाीर चांपा, बिलासपुर के साथ उड़ीसा को स्पान आपूर्ति
 
तमनार- जिंदल फाउण्डेशन, जेपीएल तमनार द्वारा अपने बहुउद्देश्यीय स्वावलम्बन परियोजना अंतर्गत क्षेत्रीय ग्रामीण महिलाओं को उद्यमी एवं स्वावलम्बी बनाने के लिए ’मशरूम उत्पादन परियोजना’ का संचालन कर रही है। जिसके माध्यम से क्षेत्र में निवासरत ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक उन्नयन सुनिश्चित कर महिला सशक्तिकरण को एक नई आयाम दी जा सके। आज तमनारांचल की ये महिलाएॅ ’मशरूम उत्पादन’ गतिविधी में संलग्न होकर आयअर्जन सुनिश्चित कर, सपरिवार विकास की ओर अग्रसर हैं। जिंदल फाउण्डेशन, तमनार की मशरूम उत्पादन परियोजना से न केवल रायगढ़ बल्कि जशपुर, कोरबा, जांजगाीर चांपा व बिलासपुर जिला भी लाभान्वित हो रही है। वहीं विभिन्न जिलों के प्रतिष्ठित व्यावसायिक कंपनियाॅ अडानी, ंिहण्डालको, अम्बुजा फाउण्डेशन, शिखर युवा मंच बिलासपुर, कोरबा बेस्ट, विजय लक्ष्मी समाज कल्याण समिति रायगढ़, आयुश शिक्षा समिति जैसे एनजीओज एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के 1800 प्रशिक्षुओं ने मशरूम संसाधन केन्द्र, तमनार से प्रशिक्षण प्राप्त कर मशरूम उत्पादन को अपने
आजिविका का माध्यम बनाया है। सत्र 2014 से प्रारंभ ’मशरूम उत्पादन परियोजना’ से जुडकर परिश्रमी महिलाओं द्वारा आज पर्यंत लगभग 9000 हजार किलोग्राम मशरूम उत्पादन कर 3.70 करोड़ लाख रूपये की मशरूम विक्रय कर चुकी हंै। वहीं जिंदल फाउण्डेशन, तमनार के मशरूम संसाधन केन्द्र, तमनार में स्थापित ’मशरूम बीज निर्माण ईकाई’ जो कि ग्रामीण किसानों का समूह ’’तमनार मशरूम समहित समूह’’ के देखरेख में संचालित छत्तीसगढ़ राज्य की आधुनिक एवं सर्व सुविधायुक्त स्पाॅन निर्माण ईकाई है, जहाॅ प्रतिदिन 800 पैकेट मशरूम बीज का निर्माण किया जा रहा है। जिसे जशपुर, कोरबा व बिलासपुर जिलों के साथ उडीसा के विभिन्न जिलों में आपुर्ति की जा रही है। जिसमें अभी तक 1.50 लाख पैकेट मशरूम बीज निर्माण व उसका विक्रय कर 33 लाख रूपये की धनराशि अर्जित की गई

     आज जिंदल फाउण्डेशन, जेपीएल तमनार की इस बहुउद्देश्यीय परियोजना क्षेत्र के लिए आयअर्जन का अनुठी व एक सशक्त विकल्प के रूप में स्थापित हो चुकी है। तमनार क्षेत्र की इन महिलाओं ने सिद्ध कर दिखाया कि ’कुछ कर गुजरने की चाह व हौसले बुलंद हो तो, कठिन से कठिन कार्य भी आसान हो जाता है।’ स्व सहायता समूह से जुड़ी ये महिलायें मशरूम उत्पादन कर अपने व परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही हैं। इन्होनें यह सिद्ध कर दिखाया कि मशरूम उत्पादन आयअर्जन का एक सशक्त माध्यम है, जहाॅ थोड़ी मेहनत व लगन से अत्यधिक लाभ अर्जित किया जा सकता आज तमनार क्षेत्र के 11 स्व सहायता समूह की 120 से अधिक महिलाएॅ एवं व्यक्तिगत रूप से 500 महिलाएॅ एवं किसान मशरूम उत्पादन गतिविधि में संलग्न होकर अपने व परिवार की आर्थिक उन्नययन करने में सफल हो रहे हैं।
इसी क्रम में क्षेत्र की महिलाओं के इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए श्री ऋषिकेश शर्मा, विभागाध्यक्ष,सीएसआर जेपीएल तमनार ने कहा कि क्षेत्रीय ग्रामीण महिलाओं ने स्वावलम्बन के रूप में मशरूम उत्पादन का चयन अपने आप में सराहनीय कदम है। इस गतिविधी ने इन ग्रामीण परिश्रमी महिलाओं के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को एक नई आयाम दी है। आज इन महिलाओं की चेहरे पर सफलता की मुस्कान देखकर मन हर्षित होता है।  

मशरूम उत्पादन ही क्यों- मशरूम सर्वाधिक पसंद की जाने वाली एक सर्वाधिक प्रोटीनयुक्त पौष्टिक सब्जी है। तमनार क्षेत्र का वातावरण जहाॅ पर्याप्त वर्षा एवं आर्दता है, जो कि मशरूम उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
उच्च तकनीक युक्त स्पाॅन लैब की उपलब्धता- क्षेत्र में मशरूम की उपलब्धता सुनिश्चित करने एवं मशरूम उत्पादन की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित एक सर्वसुविधासयुक्त ’मशरूम बीज प्रशंस्करण केन्द्र’ की स्थापना की गई है। जहाॅ प्रत्येक दिन प्रशिक्षित ग्रामीणों द्वारा 700 से 800 पैकेट ’स्पान’ विकसित किया जा रहा है।
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