spot_img
Friday, June 19, 2026

नप पंचायत उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर घरघोड़ा में हलचल तेज…राजनीतिक भूचाल के संकेत, किस करवट बैठेगा ऊंट

spot_img
Must Read

घरघोड़ा /घरघोड़ा नगर पंचायत चुनाव में इस बार बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब बीजेपी अपने गढ़ में अध्यक्ष पद गंवा बैठी और निर्दलीय प्रत्याशी ने सभी राजनीतिक समीकरणों को ध्वस्त करते हुए शानदार जीत दर्ज कर ली। अब असली घमासान उपाध्यक्ष पद को लेकर शुरू हो गया है, जहां सत्ता पक्ष में क्रॉस वोटिंग की संभावना ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है।

इतिहास रचेगी?

बहुमत के बाद भी डरी हुई बीजेपी

घरघोड़ा नप में बीजेपी के 9 पार्षद होने के बाद भी हवा कांग्रेस के पक्ष में बहना कही ना कही बीजेपी की अंदुरुनी गुटबाजी को दर्शाता है अध्यक्ष चुनाव में जिस तरह सत्ता पक्ष को मात खानी पड़ी जो इस बात को इंगित करती है कि कही ना कही एक वर्ग अंदर ही अंदर सेंध लगा रही है और वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी से इनके हौसले बुलंद हो रहे है वही कांग्रेस इसका लाभ लेने से नही चूकना चाह रही है

नगर पंचायत के 15 वार्डों में 9 बीजेपी पार्षद, 4 कांग्रेस और 2 निर्दलीय पार्षद चुनकर आए हैं निर्दलीय पार्षद कांग्रेस स्मृतिथि है ऐसे में उपाध्यक्ष पद की बाजी कौन मारेगा, यह दिलचस्प मोड़ पर आ चुका है। कांग्रेस के पास 4 पार्षदों के साथ 2 निर्दलीयों का समर्थन ओर अध्यक्ष का समर्थन जुड़ता नजर आ रहा है, तो उनकी ताकत 7 तक पहुंच सकती है। ऐसे में अगर बीजेपी के 9 पार्षदों में से 2-3 ने क्रॉस वोटिंग की संभावना से उपाध्यक्ष की कुर्सी भी हाथ से फिसल सकती है।

राजनीतिक बैकडोर डीलिंग और गुप्त बैठकों का दौर शुरू!

सूत्रों की मानें तो बीजेपी अपने पार्षदों को एकजुट रखने के लिए जोड़-तोड़ में जुट गई है। पार्टी के स्थानीय और जिला स्तर के नेता डैमेज कंट्रोल में लगे हैं, वहीं कांग्रेस भी रणनीति बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। पिछले कार्यकाल में नगर पंचायत में सत्ता पलट के इतिहास को देखते हुए इस बार भी क्रॉस वोटिंग की संभावनाएं प्रबल हैं।

सांसद और जिला अध्यक्ष की प्रतिष्ठा दांव पर!

यह चुनाव इसलिए भी दिलचस्प हो गया है क्योंकि घरघोड़ा बीजेपी के लिए सिर्फ एक नगर पंचायत नहीं, बल्कि पार्टी के जिला अध्यक्ष और सांसद का गृह नगर भी है। अध्यक्ष की हार के बाद उपाध्यक्ष पद भी हाथ से निकल गया तो यह बीजेपी के लिए बड़ा झटका साबित होगा। अब देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी अपने पार्षदों को एकजुट रख पाती है या कांग्रेस इस किलेबंदी में सेंध लगाने में सफल होती है।

नगर पंचायत के उपाध्यक्ष चुनाव को लेकर अब पूरा क्षेत्र सियासी जोड़तोड़ का अखाड़ा बन चुका है।एक तरफ बीजेपी के रणनीतिकार जहां पूरी ताकत झोंक रहे हैं, तो कांग्रेस भी इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहती। सत्ता की चाभी में निर्दलीय पार्षदों की भूमिका यहां निर्णायक साबित होगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या बीजेपी अपने गढ़ में उपाध्यक्ष की कुर्सी बचा पाएगी या फिर कांग्रेस नया इतिहास रचेगी ।

इसमे फैसला जो भी हो, घरघोड़ा की राजनीति मे आने वाले कुछ दिन जबरदस्त उठा-पटक और सियासी सरगर्मी से भरे रहने वाले हैं!

Latest News

धार्मिक आस्था के केंद्र हमारी संस्कृति और संस्कारों से जुड़ी हुई है :- लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया

आध्यात्मिक मूल्यों से ही होता है समाज का सशक्त निर्माण:-राज्यसभा सांसद देवेन्द्र प्रताप सिंह भुईंयापानी में शिव मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा समारोह...

More Articles Like This

error: Content is protected !!