9 जून रायगढ़। बिरहोर जनजाति के लोगों की आजीविका जंगल के उत्पादों पर निर्भर रहती थी। पालक जीविकोपार्जन के लिए जंगल चले जाते थे तो बच्चे पढ़ाई नहीं कर पाते थे। वे भी बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते थे, ऐसी स्थिति को देखते हुए जिंदल पावर तमनार द्वारा इनिषिएटिव लिया गया और बिरहोर जनजाति के बच्चों को नर्सरी से ही स्कूल में पढ़ाने का निर्णय लिया और सुखद स्थिति यह है कि अब यहां के बच्चे अंग्रेजी माध्यम स्कूल में ही पढ़ते हैं। इन बच्चों की पढ़ाई की सभी व्यवस्था जिंदल फाउंडेशन द्वारा की जाती है।
ग्राम पंचायत कचकोबा का सीतापारा मोहल्ला में राश्ट्रपति के दत्तकपुत्र बिरहोर जनजाति के लोग रहते हैं। इस मोहल्ले में 33 परिवार रहते हैं, इनकी आबादी 106 है। पहले यहां के लोग जंगल जाते थे, जंगल के तेंदू, चार, महुआ, चिरौंजी आदि इनके आजीविका का साधन हुआ करते थे। ये पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते थे। वर्श 2006 में जिंदल पावर तमनार द्वारा यहां के लोगों का जीवन स्तर सुधारने और इनको शिक्षित करने के लिए एक छोटी सी पहल की गई और बालवाड़ी की शुरुआत की गई। यहां प्रारंभिक शिक्षा मिलने के बाद बच्चों को आसपास के सरकारी स्कूलों में भर्ती किया जाता था। चूंकि उनके पालक आजीविका के लिए जंगल जाते थे, इसलिए बच्चों पर उनका नियंत्रण नहीं था और वे शिक्षा का महत्व नहीं जा पा रहे थे, इसलिए बच्चो बीच में ही प्राइमरी की पढ़ाई छोड़ देते थे। इनकी समस्या को देखते हुए जिंदल पावर तमनार द्वारा यह निर्णय लिया गया कि इस विशेष पिछड़ी जनजाति केबच्चों को प्रारंभ से ही अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा दी जाए ताकि वे षिक्षा के क्षे़त्र में आगे बढ़ सकें। इसके बाद उन बच्चों को नर्सरी से ही जिंदल के स्कूलों में भर्ती किया जाने लगा।

बच्चों की स्कूलिंग, परिवहन की व्यवस्था फ्री
सीतापारा के बिरहोर जनजाति के लोगों के सर्वांगिण विकास को जिंदल पावर द्वारा अपने सीएसआर के दायित्वों में शामिल करते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य व आजीविका के लिए विशेष प्रयास किया जा रहा है। बालवाड़ी सेंटर बनाया गया है, जहां खेल कूद की भी व्यवस्था की गई है वहां प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है, फिर नर्सरी में उन विद्यार्थियों को भर्ती किया जाता है। इस सेंटर को को आॅर्डिनेट करने वाले आनंद पंडा ने बताया कि बच्चों के जूता, मोजा, ब्लेजर, यूनिफार्म से लेकर सभी काॅपी, पेन, पुस्तक तक की व्यवस्था जिंदल फाउंडेशन द्वारा किया जाता है। इन विद्यार्थियों को ओपी जिंदल स्कूल कुंजेमुरा में फ्री में पढ़ाई कराई जाती है। इन विद्यार्थियों के आने जाने के लिए बस की भी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
पोशण आहार और ट्यूशन भी
स्कूल की पढ़ाई के बाद अभी गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं। इन दिनों में पालक जंगल के उत्पाद इकट्ठा करते हैं। वहीं बच्चे पढ़ाई न भूल जाएं इसलिए जिंदल फाउंडेशन द्वारा एक स्पेशल शिक्षा की व्यवस्था सीतापारा के सेंटर के लिए की गई है। उनके द्वारा यहां अंग्रेजी की पढ़ाई कराई जाती है। इस सेंटर में बच्चों के पोशण को ध्यान में रखते हुए बारहों महीने बच्चों के लिए सुबह नाष्ता, दोपहर का भोजन और षाम का नाष्ता सहित पोशण आहार की व्यवस्था जिंदल फाउंडेशन द्वारा की गई है, ताकि पालकों पर बोझ न पड़े। उन्हें साफ पानी देने के लिए आर ओ भी लगाया गया है।
विवाह के बाद दसवीं, बारहवीं पढ़ने की इच्छुक महिलाओं को भी पढ़ा रहे
विवाह के बाद भी पढ़ने की इच्छुक महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए पढ़ाने का काम जिंदल फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। गांव की हीरमति बिरहार ने बताया कि उसकी षादी हो चुकी है, उसे आगे पढ़ने की इच्छा हुई तो जिंदल foundeshn द्वारा पत्राचार के माध्यम से उसकी व्यवस्था की गई। इस वर्श उन्होंने दसवीं की परीक्षा दी है।इसी प्रकार दिलमति बिरहोर ने इस साल बारहवीं की परीक्षा जिंदल के सहयोग से दिलाया है।
जमीन को खेती के लायक जिंदल ने बनाया
गांव के बुजुर्ग भजोराम बिरहोर ने बताया कि पहले गांव के लोग अशिक्षित थे, बच्चों को भी पढ़ाने की व्यवस्था नहीं थी। जिंदल पावर तमनार द्वारा गांव को गोद लेने के बाद स्थिति में सुधार हुआ है, गांव के लोगों को सरकारी नौकरी भी मिल रही है, बच्चे अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। सरकार ने पहले टिकरा दिया था, उसे खेत बनाने व पानी की व्यवस्था करने का काम जिंदल पावर द्वारा किया गया है।


