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Wednesday, August 12, 2026

रामचंद्र शर्मा द्वारा आयोजित बोरे बासी कार्यक्रम सोशल मीडिया में वायरल…लोग कर रहे हैं प्रशंसा…1 लाख से अधिक लोगों ने देखा वीडियो…

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रायगढ़। शहर के शनि मंदिर के सामने मजदूरों के बीच 1 मई मजदूर दिवस के अवसर पर आयोजित “बोरे-बासी” कार्यक्रम अब एक सामान्य आयोजन नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा सामाजिक संदेश बनता दिखाई दे रहा है। नव निर्माण संकल्प समिति के तत्वावधान में समाजसेवी रामचंद्र शर्मा द्वारा मजदूर दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम के एक से अधिक वीडियो पिछले एक सप्ताह से सोशल मीडिया में जबरदस्त तरीके से वायरल हो रहे हैं । जानकारी के अनुसार इन वीडियो को अब तक 1 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं, वहीं हजारों लोगों ने इसे साझा कर मजदूर सम्मान की इस पहल की सराहना की है।

कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां किसी प्रकार का दिखावा या राजनीतिक मंच नहीं था, बल्कि मजदूरों के बीच बैठकर उनके सम्मान और स्वाभिमान को केंद्र में रखा गया। भीषण गर्मी के बीच बोरे-बासी जैसे छत्तीसगढ़ी पारंपरिक भोजन को मजदूरों के साथ साझा कर आयोजनकर्ताओं ने यह संदेश दिया कि समाज की असली ताकत मेहनतकश वर्ग है, और उनका सम्मान केवल भाषणों से नहीं बल्कि व्यवहार से होना चाहिए।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के दौरान 1 मई को “बोरे-बासी दिवस” के रूप में मनाने की शुरुआत हुई थी। उस समय इस परंपरा ने प्रदेशभर में सांस्कृतिक पहचान और श्रमिक सम्मान का प्रतीक बनकर नई पहचान बनाई थी। हालांकि सरकार बदलने के बाद यह परंपरा धीरे-धीरे सीमित होती चली गई, लेकिन रायगढ़ में नव निर्माण संकल्प समिति ने इसे फिर से जनचर्चा में ला खड़ा किया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में मजदूरों, रिक्शा चालकों, दिहाड़ी श्रमिकों और आम लोगों की बड़ी भागीदारी दिखाई दे रही है। यही कारण है कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम न रहकर आम जनता की भावनाओं से जुड़ गया। लोगों का कहना है कि आज जब राजनीति केवल मंचों और नारों तक सीमित होती जा रही है, ऐसे समय में मजदूरों के बीच जाकर उनके साथ बैठना और उनका सम्मान करना समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला कदम है।

रामचंद्र शर्मा की इस पहल को लेकर शहर में लगातार चर्चाएं हो रही हैं। युवाओं से लेकर सामाजिक संगठनों तक में इस कार्यक्रम की सराहना की जा रही है। सोशल मीडिया पर लोग इसे “जमीन से जुड़ी राजनीति”, “मजदूर सम्मान का असली उदाहरण” और “छत्तीसगढ़ी संस्कृति की वापसी” जैसे शब्दों से जोड़कर देख रहे हैं।

राजनीतिक और सामाजिक जानकारों का मानना है कि यह आयोजन आने वाले समय में रायगढ़ में जनसरोकार आधारित अभियानों की नई शुरुआत साबित हो सकता है। जिस तरह एक साधारण “बोरे-बासी” कार्यक्रम ने लाखों लोगों का ध्यान आकर्षित किया है, उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता आज भी दिखावे से ज्यादा संवेदनशील और जमीन से जुड़े प्रयासों को महत्व देती है।

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