बेसहारा बच्चों को न सिर्फ सहारा बल्कि मुख्य धारा से जोडकर रोजगार भी दे रहे…जिंदल चिल्ड्रन होम में बच्चों को मिल रहा दुलार के साथ जीवन संवारने का मौका

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23 अप्रैल रायगढ़। बेसहारा बच्चों को एक अभिभावक की तरह स्नेहपूर्ण माहौल देने का काम जिंदल चिल्ड्रन होम सावि़त्री नगर तमनार द्वारा किया जा रहा है। ऐसे बच्चों को न सिर्फ यहां सहारा मिल रहा हैए बल्कि उनका जीवन स्तर सुधारने के साथ ही समाज की मुख्य धारा से जोड़कर उन्हें रोजगार के लिए भी स्किल्ड किया जा रहा है ताकि वे स्वयं अपना जीवन चला सकें।

सावित्रीनगर तमनार में तीन साल पहले 9 मार्च 2022 को जिंदल चिल्ड्रन होम की शुरूआत की गई थी। यहां लड़के और लड़कियों के लिए अलग अलग अलग चिल्डृन होम बनाया गया है। वर्तमान में यहां जरूरतमंद 50 लड़के और 50 लड़कियां रह रहे हैं। यह संस्था जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है। संस्था का संचालन जिंदल पावर प्लांट तमनार द्वारा सीएसआर मद से किया जा रहा है। इस संस्था में ऐसे बच्चों को रखा जाता हैए जिन्हें उनके मांए बाप ने किसी विपरीत परिस्थितियों में छोड़ दिया है। किसी कारणवश सिंगल पैरेंट्स भी बच्चों को छोड़ देते हैं। ऐसे बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी रायगढ़ द्वारा सेंटर में भेजा जाता है। इसके अलावा जब सेंटर के लोगों को भी ऐसे बच्चों के बारे में पता चलता है तो उसकी जानकारी सीडब्ल्यूसी को दी जाती है। यहां 6 वर्ष के बच्चों से लेकर 18 वर्ष की आयु तक किशोर व किशोरियों को रखा जाता है। उनके लिए अलग अलग खेल मैदान व ओपन जिम की भी व्यवस्था चिल्ड्रन होम कैंपस में ही की गई है। 

सीबीएसई स्कूल में दिलाते हैं शिक्षा

जिंदल चिल्ड्रन होम में रहने वाले बेसहारा बच्चों को जिंदल प्रबंधन द्वारा क्वालिटी एजुकेशन भी दी जाती है। यहां बच्चों को सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूल में पढ़ाया जाता है। यहां के बच्चे इंग्लिश माध्यम में शिक्षा प्राप्त करते हैं। सीबीएसई में स्कूली शिक्षा के अलावा कमजोर विद्यार्थियों के लिए ट्यूशन की भी व्यवस्था की जाती है। ये बच्चे बोर्ड परीक्षा में टाॅपर भी रहे हैंए उन्हें 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त हो चुके हैं।

18 के बाद काॅलेज की पढ़ाई का खर्च उठाते हैं

बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने वाले ऐसे बच्चे जो आगे काॅलेजए इंजीनियरिंग या मेडिकल की पढ़ाई करना चाहते हैंए ऐसे बच्चों को आगे भी पढ़ाई में मदद की जाती है। ऐसे बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च जिंदल द्वारा सीएअआर मद से उठाया जाता है। ऐसे बच्चे जिन्होंने देरी से पढ़ाई शुरू की और उनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक हो गई हैए उन्हें भी स्किल ट्रेनिंग देकर रोजगार या स्वरोजगार के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम जिंदल फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है। बीते सालों में ऐसे तीन युवकों को 6 माह का कोर्स कराने के बाद जाॅब में लगा दिया गया है इसके अलावा एक युवती को भी रोजगार से जोड़ा जा चुका है।

स्टेट लेबल बैडमिंटन प्रतियोगिता में हो चुकीं हैं शामिल

जिंदल चिल्ड्रन होम में न सिर्फ उन्हें शिक्षा दी जा रही हैए बल्कि उनके सर्वांगिण विकास के लिए भी काम किया जा रहा है। उन्हें योगए म्यूजिक के अलावा स्पाोर्ट्स में भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस केंद्र की चार लड़कियां स्टेट लेबल बैडमिंटन प्रतियोगिता में भी शामिल हो चुकीं हैं। वे रायपुरए भिलाईए बेस्ट बंगाल में भी आयोजित बैडमिंटन प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुकीं हैं।

जिंदल चिल्ड्रन होम में बेसहारा बच्चों को रखकर उनका सर्वांगिण विकास किया जा रहा हैए उन्हें अच्छी शिक्षा के साथ शारीरिक विकास के अलावा खेल व अन्य गतिविधियों में परिपक्व किया जा रहा है। 18 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को उनकी शैक्षणिक गतिविधियों के अनुसार हायर एजुकेशन की व्यवस्था भी जिंदल पावर द्वारा सीएसआर से किया जाता है। बच्चों को रोजगार दिलाने का भी काम जिंदल फाउंडेशन द्वारा किया जा रहा है।

ऋषिकेश शर्मा एएसोसिएट वाइस प्रेसीडेंट एंड ग्रुप हेड सीएसआरए जेपीएल तमनार

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