बनोरा आश्रम में रंगोत्सव के आयोजन से समाज में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार…गुरु चरणों में रंग अर्पित करने के बाद शहरवासियों ने खेली होली

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रायगढ़ :- घंटों कतार बद्ध होकर गुरु चरणों में गुलाल अर्पित करने के बाद शहरवासियों ने होली खेली। बनोरा आश्रम में रंगोत्सव के आयोजन ने समाज के आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो रहा हैं। पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के कर कमलों से भक्तों को स्वय को रंगे जाने के साथ ही आत्मीय संतोष का अनुभव हुआ। बनोरा परिसर भटके हुए मानव मन की एकाग्र करने की पावन स्थली है। पूज्य बाबा जी के दर्शन कर होली से रंगे जाने हेतु प्रबुद्ध जन जाति पाती ऊंच नीच अमीर गरीब का भेद भुलाकर घंटों कतार बद्ध होकर अपनी पारी का इंतजार करते रहे। राजनीति, धार्मिक, व्यापारिक, समाजिक, संस्थाओं सहित मीडिया से से जुड़े लोग आम आदमी महिलाएं नेता पार्षद सभी कतार में शामिल होकर अपनी पारी की प्रतिक्षा करते रहे। बनोरा आश्रम का यह दृश्य प्रेम और एकता के अदभुत संगम का गवाह बन गया। बनोरा आश्रम में होली खेलने की शुरुवात करने के लोगों के बीच प्रेम और एकता की भावना में बढ़ोतरी हो रही है। जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन नजर आ रहा हैं। कतारबद्ध होकर आश्रम में होली खेले जाने से नकारात्मकता का नाश होता है। नकारात्मकता भाव खत्म होने से मन और आत्मा की शुद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है । आश्रम परिसर में होली खेलने की शुरुवात से परिवार के सदस्यों में आपसी सामंजस्य, प्रेम की भावना बढ़ी है। परिवारों में बढ़ती खाई को पाटने और टूटते परिवारों को जोड़ने में बनोरा आश्रम की होली अहम भूमिका निभा रही है। आश्रम परिसर में होली खेलने की शुरुवात किए जाने से समाज का नैतिक उत्थान हो रहा है आश्रम में होली खेले जाने से शुरुवात जनमानस में आध्यात्मिक चेतना जागृत करने के कामयाब हो रही है। एक वो दौर था जब होली के अवसर पर व्यक्ति अधिक नशा पान कर वाद विवाद करता था ।आज बनोरा आश्रम में होली खेलने वाले पंक्तिबद्ध लोग समाज को यह संदेश दे रहे है कि होली का त्यौहार नशा सेवन के बिना शील शालीनता के साथ सहजता से मनाया जा सकता है। बनोरा आश्रम में शालीनता पूर्वक अनुशासित तरीके से मनाई जाने वालीं आने वाली पीढ़ी को इस त्यौहार को बिना हुड़दंग के होली मनाए जाने के लिए प्रेरित करेगी। शालीनता पूर्वक होली मनाए जाने से व्यक्ति का आध्यात्मिक विकास हो रहा है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन को सार्थक बना रहा है। बनोरा आश्रम में कतारबद्ध होकर आपसी भेदभाव भुलाकर होली खेलने से सामाजिक समरसता की भावना बढ़ती हैं। आश्रम परिसर में होली खेले जाने की परिपाटी आम जनमानस को आनन्द की अनुभूति करा रही ।आनंद की अनुभूति से मनुष्य के जीवन में खुशी और उत्साह बढ़ रहा है। आध्यात्मिक गुरु पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी के सान्निध्य ने आम जनमानस के जीवन को सार्थक बना रहा । आध्यात्मिक आश्रम में होली खेलना आम जनमानस के लिए एक अद्भुत अनुभव साबित हुआ है ।

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