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Sunday, June 14, 2026

मशरूम उत्पादन महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने का अच्छा मौका है: सक्सेना

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स्वावलंबन परियोजना के तहत मौहापाली में जिंदल  फाउंडेशन द्वारा दिया गया प्रशिक्षण

13 जून रायगढ़। महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए ग्राम पंचायत मौहापाली में स्वालंबन परियोजना के अंतर्गत जिंदल फाउंडेशन द्वारा मशरूम रूम उत्पादन के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में गांव के करीब सात स्व सहायता समूहों की महिलाएं बड़ी संख्या में षामिल हुईं। महिलाओं ने प्रशिक्षण के बाद अपने घर में मशरूम की फसल लेने का निर्णय लिया। जिंदल फाउंडेशन द्वारा सभी महिलाओं को मषरूम का बीज निशुल्क वितरित किया गया।

प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं को संबोधित करते हुए जेपीएल के वाइस प्रेसिडेंट और डोलेसरा प्रोजेक्ट हेड नीरज सक्सेना ने प्रशिक्षण को महिलाओं के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि हम सब किसान से फपर उठे हैं। घर की महिलाओं को गृह लक्ष्मी कहा जाता है, यह प्रशिक्षण भी महिलाओं के लिए लक्ष्मी बनने का एक मौका है। सक्सेना ने कहा कि महिलाएं स्वयं ही अपने घर में इसे कर सकेंगीं। इससे होने वाली कमाई से बच्चों को पढ़ा सकतीं हैं, पुरूशों की आय में आर्थिक मदद करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर चल सकतीं हैं। 

मैनेजर सीएसआर शीतल पटेल ने कहा कि अधूरी जानकारी के साथ काम करने पर रिजल्ट सही नहीं आता है, इसलिए प्रशिक्षण की आवश्यकता पड़ती है। प्रषिक्षण के बाद निश्चित रूप से मशरूम का उत्पादन अच्छा होगा।मशरूम उत्पादन कम खर्च में अधिक फायदा देने वाला, इसमें समय भी कम लगता है। उन्होंने कहा कि जिंदल फाउंडेशन चाहता है कि महिलाएं खुद कमाकर काबिल बनें। ग्राम पंचायत मौहापाली के सरपंच श्याम लाल राठिया ने कहा कि जिंदल गुणों फाउंडेशन द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए अच्छा कार्य किया जा रहा है, इससे उनका आर्थिक स्तर सुधरेगा। कार्यक्रम में जनपद पंचायत सदस्य गीता पैकरा, उपसरपंच तैल सिंह, विद्याधर साहू सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे।

तालाब का होगा गहरीकरण स्कूल में बनेगी बाउंड्रीवाॅल

सरपंच श्याम लाल राठिया की मांग पर वीपी और प्रोजेक्ट हेड श्री नीरज सक्सेना ने गांव के दो तालाबों का जिंदल द्वारा गहरीकरण कराने व स्कूल में बाउंड्रीवाॅल बनवाने की घोषणा की। जिसका गांव के लोगों ने तालियों के साथ स्वागत किया। इससे पहले संतोश शर्मा द्वारा महिलाओं को मशरूम उत्पादन के प्रत्येक प्रक्रिया की चरणबद्ध जानकारी दी गई। 

काम करने के बाद खाली समय में कमा रहीं 

सुभाशिनी गुप्ता ने बताया कि वह दिन भर काम करतीं हैं। नौकरी के बाद जितना समय मिलता है, उसमें वे अपने घर लिबरा में मशरूम उत्पादन का काम करतीं हैं। उन्होंने बताया कि 2010 में मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया था, इस दौरान अनेक स्व सहायता समूह की महिलाओं को जोड़ा अब वह खुद ही एक सीजन में डेढ़ से दो लाख रूपए तक कमा रहीं हैं। गांव की महिलाओं को बताया गया कि समूह में मशरूम उत्पादन करने पर षेड बनाने के लिए जिंदल द्वारा 50 प्रतिशत आर्थिक सहयोग भी किया जाएगा।

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