पुसौर क्षेत्र में पशुधन विकास की दिशा में अदाणी फाउंडेशन की व्यापक पहल…2062 पशुओं का उपचार, 2820 का डिवर्मिंग, 334 किसानों को प्रशिक्षण; नस्ल सुधार और चारा संवर्द्धन पर जोर

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रायगढ़, 13 फरवरी 2026 — अदाणी फाउंडेशन द्वारा रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड में पशुधन विकास, उन्नत नस्ल प्रोत्साहन और डेयरी प्रबंधन को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से विभिन्न सामुदायिक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सयंत्र के परिधीय ग्रामों में पशुधन स्वास्थ्य, वैज्ञानिक पशुपालन और चारा प्रबंधन को बढ़ावा देकर पशुपालकों की आजीविका में सुधार लाना है। इसी क्रम में वर्ष 2025–26 के दौरान कई महत्वपूर्ण गतिविधियों का प्रभावी आयोजन किया गया।

इस वर्ष कुल 19 पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित हुए, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों के 2062 पशुओं की जांच और उपचार किया गया तथा 2820 पशुओं का डिवर्मिंग किया गया। इन शिविरों में 387 बांझ पशुओं की पहचान की गई, जिनमें से 219 पशुओं का उपचार किया गया। ग्रामीणों ने बताया कि अब पशु स्वास्थ्य सेवाएँ गाँवों तक पहुँच रही हैं, जिससे उपचार के लिए दूरी तय करने की आवश्यकता कम हो गई है और पशुपालन अधिक सुगम हुआ है।

पशुधन प्रबंधन में सुधार के लिए 10 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 334 ग्रामीणों—144 पुरुष और 190 महिलाएँ—ने सक्रिय भागीदारी दर्ज की। ये प्रशिक्षण छोटे भंडार, सरवानी, जेवरीडीह, अमलीभौना, कोटमरा, अमलीपाली, चिखली, रैबार, सूपा और कारिछापर जैसे ग्रामों में हुए। प्रशिक्षण में पशुपालकों को स्वास्थ्य प्रबंधन, रोग नियंत्रण, नस्ल सुधार, आहार प्रबंधन और डेयरी तकनीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

नस्ल सुधार के क्षेत्र में वर्ष 2025–26 के दौरान 483 कृत्रिम गर्भाधान कराए गए, जिनसे अब तक 221 उन्नत नस्ल के बछड़े जन्मे हैं, जिनमें 180 बछिया शामिल हैं। ये भविष्य में दुग्ध उत्पादन की क्षमता बढ़ाने में सहायक होंगी। चारा संवर्द्धन के लिए छह ग्रामों के 50 पशुपालकों को 200 किलोग्राम बरसीम और 50 किलोग्राम ओट्स वितरित किए गए। इस वर्ष कुल 80 पशुपालक प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित हुए।

परियोजना के प्रारंभ वर्ष 2022 से जनवरी 2026 तक कुल 45 पशु स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से 9104 पशुओं की जांच और उपचार किया जा चुका है, जबकि 49 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 1970 किसानों ने सहभागिता की है। ग्रामीणों ने इन कार्यक्रमों को पशु स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन और आर्थिक स्थिति में सुधार के लिए उपयोगी बताया है। रुचिदा और रैबार के पशुपालकों—भरत लाल साहू, मोहन लाल साहू, हिराधर पटेल, टेकरम पटेल, गणपत सिदार और दिनमणि सिदार—ने कहा कि इन शिविरों और प्रशिक्षणों से उन्हें पशुपालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध हो रही हैं।

अदाणी फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने बताया कि संस्था का उद्देश्य पशुधन स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और डेयरी प्रबंधन को मजबूत बनाकर ग्रामीण समुदाय की आजीविका को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन आने वाले समय में सेवाओं की पहुँच बढ़ाने और अधिक संख्या में पशुपालकों को तकनीकी समर्थन उपलब्ध कराने पर कार्य करेगा। कार्यक्रमों के सफल संचालन में बायफ संस्था के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार और बिकास बराल, एआई टेक्नीशियन, पशु सखी तथा फाउंडेशन की टीम सदस्य निधि सेन और सोमप्रभा गोस्वामी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

छत्तीसगढ़ में अदाणी फाउंडेशन की अन्य पहलें

अदाणी फाउंडेशन छत्तीसगढ़ में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण, आजीविका वृद्धि, बुनियादी ढाँचा विकास, खेल और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में सतत रूप से कार्य कर रहा है। रायगढ़, कोरबा, सरगुजा और बालोदाबाज़ार सहित कई जिलों में नीगम और फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों के माध्यम से स्कूली बच्चों के लिए शिक्षा सहायता, स्वास्थ्य जांच, पोषण कार्यक्रम, स्वच्छता पहल, महिला समूहों की आय वृद्धि परियोजनाएँ, युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण, किसान क्लब, जल संरक्षण कार्य और ग्रामीण विकास से जुड़े अनेक प्रयास निरंतर जारी हैं। फाउंडेशन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाना और उन्हें दीर्घकालिक विकास से जोड़ना है।

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