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Sunday, February 1, 2026

पीएफएमएस घोटाले पर घरघोड़ा बीइओ सख्त, स्कूलों में क्रय समानों की भौतिक सत्यापन का आदेश…जिले के अन्य तहसील क्षेत्रों में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने अधिकारी वर्ग की उदासीनता से मिली छूट

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रायगढ़। छात्रों तथा स्कूलों के मूलभूत सुविधाओं के लिए पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम ( पीएफएमएस) की राशि दर्ज बच्चों के आधार पर दी जाती है। संस्थान प्रमुखो के द्वारा इस राशियों का दुरुपयोग करते हुए अपने ही परिचित, स्वजनों को भुगतान,फर्जी बिल वह भी बिना पंजीकृत जीएसटी वाले दुकानों से खरीदी का मामला सामने आया था । इसे पूर्व में भी प्रकाशित किया था। ऐसे में अब इस राशि के दुरूपयोग की तह तक जाने एवं भ्रष्टाचार को पकड़ने के लिए भौतिक सत्यापन का आदेश घरघोड़ा बीईओ ने जारी किया है। इससे गफलत करने वाले स्कूलों के प्रबंधक में हड़कंप मच गया है।

दरअसल पीएफएमएस यह वित्त मंत्रालय, भारत सरकार की एक पहल है जो सरकारी वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए एक वेब-आधारित प्रणाली है, जो प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी )और अन्य सरकारी भुगतानों का प्रबंधन करती है। स्कूलों में इस राशि को रख रखाव एवं अन्य खर्चे के साथ छात्रों को अध्ययन में मूलभूत सुविधाएं देने के लिए प्रदान की जाती है। इसके तहत अधिकतम 50 से अधिक25000 तथा 30 बच्चों वाले स्कूलों में10 हजार रुपए की राशि दी जाती है। इस राशि के दुरूपयोग किए जाने की बीते कुछ माह पहले निकलकर आई थी। जिसमें प्रधान पाठकों पर फर्जी बिल एवं अपने ही रिश्तेदारों के खाते में राशि हस्तांतरित करने की बात सामने आई। इसके अतिरिक्त उक्त खरीदी को भी नियमों के विपरीत एवं अनाधिकृत फर्म यानी बैगेर जीएसटी वाले संस्थानों से की गई। सच्चाई की पड़ताल में यह भी सामने आया कि खरीदी किए बिना ही बिल भुगतान किया गया है। इन सभी वस्तु स्थिति के मद्देनजर घरघोड़ा के सभी स्कूलों में विगत चार वर्षों के क्रय गए स्थायी व 2 वर्षो के अस्थायी समाग्री के भौतिक सत्यपान हेतु निर्देश जारी किये गये है। देखा जाए तो भौतिक सत्यापन में पीएफएमएस से खरीदी की सच्चाई। परत दर परत सामने आने की बात कही जा रही है। अब देखना यह होगा कि भुगतान की राशि बिल तथा खरीदी किए गए उपकरण व अन्य की जांच किस स्तर में होती है, क्या मापदंड होता है ताकि पीएफएमएस राशि की सच्चाई सामने आ सके। 

बालबाड़ी के मद को भी नही बख्श रहे है

केंद्र सरकार व राज्य सरकार के माध्यम से अधिकांश स्कुलो में बालबाड़ी की शुरुवात की गयी है जिसमे प्रत्येक बालबाड़ी के लिये 15 हजार की राशि प्रदाय की गई थी पँरन्तु छोटे बच्चों के लिये आयी इस राशि को भी नही बख्शा गया व अधिकांस स्कुलो में फर्जी बिल लगाकर राशि का आहरण कर लिया गया है।

शिक्षक खुद व रिश्तेदारों को बना रहे है वेंडर

घरघोड़ा ब्लाक में देखा जा रहा है कि शिक्षक खुद अपने परिवार के सदस्यों को वेंडर बना कर मोटी राशि स्वयं या सदस्यों के खाते में राशि डाल भस्टाचार को अंजाम दे रहे है शिक्षा विभाग अगर बारीकी से जांच करे तो एक बड़ा भस्टाचार का मामला उजागर होगा।

घरघोड़ा के अलावा अन्य बीइओ उदासीन 

पीएमएस की राशि जिले के सभी स्कूलों में मिलती है लेकिन गड़बड़ी के तौर पर घरघोड़ा में सामने आया है। ऐसे में घरघोड़ा सुर्ख़ियों में रहा। इस बीच तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी के द्वारा बिल भुगतान जांच करवाया गया, जब तक जांच की रिपोर्ट आती वे रिटायर हो गए। जांच रुक गई, अब नए बीईओ ने इस दिशा में पहल की हैं जबकि यह घोटाले का खेल पूरे जिले में हो रहा है परंतु अन्य अधिकारी उदासीन है। बहरहाल घरघोड़ा विकास खंड अधिकारी के जांच आदेश से स्कूल के संस्थान प्रमुखों यानी प्रधान पाठकों में हलचल मचा के रख दिया है।

स्कूलों में शाला अनुदान की राशि मे गफ़लत किये जाने की लगातार अखबारों में प्रकाशित समाचारों से विभाग की छबि धूमिल हो रही थी, इसलिए हमने घरघोड़ा के सभी स्कूलों में विगत 4 वर्षों के क्रय किए गए स्थायी व 2 वर्षो के अस्थायी समाग्री के भौतिक सत्यपान हेतु निर्देश जारी किये गये है। नियम विपरीत कार्य करने वालो के विरुद्ध कठोर कार्यवाही भी की जाएगी।

संतोष कुमार सिंह, विकासखंड शिक्षा अधिकारी , घरघोड़ा

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