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Tuesday, March 17, 2026

अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा के आध्यात्मिक ज्ञान के जरिए आलोकित हुआ मानव समाज

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अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा के आध्यात्मिक ज्ञान के जरिए आलोकित हुआ मानव समाज

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गुरु पूर्णिमा पर विशेष

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गुरु-वचनों को आत्म सात करने वालो के जीवन की बदल रही दशा दिशा

रायगढ़:-सनातन संस्कृति में आषाढ़ मास की पूर्णिमा एवम महर्षि वेद व्यास जी की जयंती को गुरु पूर्णिमा पर्व के रूप में मनाया जाता है। मनुष्य जीवन में मौजूद अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले महान व्यक्ति को ही गुरु माना जाता है।आध्यात्मिक और शैक्षणिक गुरुओं को सम्मान देने वाले हेतु गुरु पूर्णिमा एक धार्मिक उत्सव है। गुरु आध्यात्मिक ज्ञान एवम संभावनाओ से भरा अथाह खजाना है जो किसी भी जाति धर्म आस्था संप्रदाय से जुड़े लोगो के लिए निः शुल्क उपलब्ध होता है। अज्ञानता के द्वार खोल गुरु ज्ञान का खजाना कोई भी आसानी से हासिल कर सकता है।आध्यात्मिक गुरु एवम महान संत बाबा प्रियदर्शी राम जी ने अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा को अध्यात्मिक ज्ञान का विश्व विद्यालय बना दिया। इस विश्वविद्यालय से देश भर से विभिन्न धर्म,समाज, संप्रदाय से जुड़े लोग आध्यात्मिक ज्ञान हासिल कर रहे है। पूज्य बाबा प्रियदर्शी राम जी ने मानव समाज के सामने जीवन में सुख शांति का मंत्र रखते बताया कि मनुष्य जीवन में सुख शांति का संबंध साधनों की उपलब्धता से नही बल्कि मन की अवस्था पर निर्भर है परिस्थिति चाहे कैसी भी रहे हर परिस्थिति में मनुष्य प्रसन्न रह सकता है। मन के प्रसन्न रहने की अवस्था ही जीवन में खुशियों का स्त्रोत बन जाती है।बाबा प्रियदर्शी राम ने आत्म बल के जरिए अघोर परंपरा से जुड़े शिष्यों के अंदर ऐसी प्रेरणाएँ भरी जिसके वजह से शिष्य सदाचार के मार्ग में चलने में सफल हुए । एक गुरु के नाते बाबा प्रियदर्शी राम ने शिष्यों को साधना मार्ग के अवरोधों एवं विघ्नों के निवारण का सहज उपाय बताया। पूज्य पाद ने अपने शिष्यों को उनकी ही अन्त: शक्ति से ही ना केवल परिचित कराया बल्कि उसे जागृत एवं विकसित करने का हर संभव उपाय भी बताया। बाबा प्रियदर्शी ने यह बताया कि स्कूली शिक्षा में अधिक नंबरों के जरिए हासिल की गई डिग्री धारी या अधिक पैसा कमा कर संपति जुटाने वाले साधक ही समाज में सफल माने जाए यह आवश्यक नही है। मानव सेवा करने वाले व्यक्ति जीवन मे सही मायने में सफल माने जाते है। बनोरा की इस अध्यात्मिक पाठशाला ने समाज को ऊंचाई हासिल करने के साथ ऊंचाई में बने रहने का मार्ग भी बताया। बनोरा आश्रम की मानव सेवी गतिविधियां अंतिम पंक्ति में खड़े साधन विहीन लोगो के जीवन के मूलभूत आवश्यकता शिक्षा चिकित्सा मुहैया कराने में सफल हुई है। अघोर गुरु पीठ बनोरा के पीठाधीश्वर प्रियदर्शी बाबा राम जी पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी के सूक्ष्म स्वरुप की अनुपम धरोहर ही है। तीन दशक पहले बाबा प्रियदर्शी राम जी के चरण रज पाकर पावन हुई बनोरा की यह पावन स्थली ज्ञान प्रेम संस्कार की त्रिवेणी बन चुकी जहां से देश भर अघोर पंथ से जुड़े साधक जीवन से जुड़े रहस्यमयी जिज्ञासाओं को आसानी से समझ रहे है। वैचारिक मतभेद से समाज में वैमनस्यता बढ़ रही। कटुता बढ़ रही है। रिश्तों में प्रेम का अभाव हो रहा है। व्यवसायिक शिक्षा को प्राथमिकता दिए जाने से समाज में नाना प्रकार की विसंगतियां आ रही है। अघोरेश्वर महा प्रभु आपका ही सूक्ष्म स्वरुप आपसे मिलती भाव भंगिमा, आपके उद्देश्य, आप जैसी चमत्कृत शक्ति का अहसास अघोर पंथ से जुड़े शिष्यों को आज भी बनोरा में सहजता से दृष्टगोचर हो रहा है।अघोर पंथ के जुड़े शिष्यों के लिये अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा

पावन तीर्थ है। प्रियदर्शी राम जी आपके चरण रज सभी के माथे में आशीर्वाद स्वरुप मौजूद रहे । आपके जीवन के आदर्श मानव जाति के लिए अनुपम धरोहर है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आपके शिष्यो को ऐसा आशीर्वाद मिले कि मोह-माया और बंधन से परे होकर मानव हित के लिये अपने जीवन को समर्पित कर सके।अधोरपंथ की अभिमंत्रित भभूत मानव जाति के माथे पर सुशोभित रहे। भभूत की अनुभूति से हर पल जीवन में संतोष हासिल होता रहे। देव-महादेवो के गढ़े हुये प्रतिमाओं की पूजा की बजाये कर्म ही पूजा बन जाये। कर्म फल की चिंता से मुक्त होकर छोटी-छोटी ईकाइयों के रुप में मौजुद आपके शिष्य इतने सशक्त बन जाए कि मजबूत सबल राष्ट्र निर्माण की परिकल्पना धरातल पर मूर्त रुप ले सके। श्मशान से समाज की और जिस अधोसंरचना का सूत्रपात अघोरेश्वर ने किया था उसे आपने ही उसे भव्य स्वरुप दिया है। सर्वहारा वर्ग के सहारा के रुप में आपकी मौजुदगी अतिम पंक्ति में खड़े मजबूर विवश लोगो का मार्गदर्शन कर रही है। प्रियदर्शी आपके श्री चरणो में सभी शिष्यो का शत्-शत् नमन शत्-शत् नमन । 

आस्था की त्रिवेणी बनी अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा

मानव कल्याण हेतु अपना जीवन समर्पित करने वाले पूज्य पाद बाबा प्रियदर्शी राम का जीवन अंतिम पंक्ति के खड़े ऐसे साधन विहीन लोगो का सहारा है जो जीवन से निराश हो चूके है। आध्यात्मिक ज्ञान हेतु अघोर गुरु पीठ ट्रस्ट बनोरा आम लोगो के लिए आस्था का केंद्र बन चुका है।

बनोरा में आज गुरु पूर्णिमा महोत्सव

ग्राम बनोरा स्थित अघोर गुरु पीठ ब्रम्हानिष्ठालय में प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी गुरु पूर्णिमा का आयोजन धूमधाम से किया जायेगा। 9.00 बजे से 12.30 बजे गुरुदर्शन के बाद बाबा प्रियदर्शी के श्री मुख से 4.30 बजे आशीर्वचन होगा।

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