जिलेभर के दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन…अनिश्चितकालीन धरने पर गए कर्मचारी…

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रायगढ़ / 2023 सत्र का विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहा है सभी वर्ग के कर्मचारियों अपनी मांगों को लेकर आए दिन कलेक्ट्रेट का घेराव कर रहे हैं। तो वही कांग्रेस सरकार चुनाव जीतने के पहले अपने घोषणापत्र में अनेक वादे लुभावने वाले दैनिक वेतन भोगी वर्ग से की थी जिसे आज तक पूरा नहीं कर पाई।

विदित हो कि सोमवार की दोपहर को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने जहां कलेक्ट्रेट का घेराव किया हजारों की तादाद में आए, उच्च कुशल, कुशल, अर्ध कुशल, अ कुशल, जॉब दर, मास्टर रोल इत्यादि। यह सभी श्रमिक बहुत ही कम पैसों पर किसी न किसी विभाग में दैनिक वेतन भोगी के रूप में काम कर रहे हैं तथा दिनोंदिन महंगाई आसमान छू रही है ऐसी स्थिति में अपने परिवार का पालन पोषण कर पाना इन कर्मचारी के लिए एक कठिन परिस्थिति हो गई है। तो कई कर्मचारी ऐसे भी हैं जिन्होंने जीवन भर दैनिक वेतन पर काम किया है और केवल 6 से 8 महीने ही रह गए हैं उनकी सेवा समाप्त होने में, कर्मचारी गण का कहना है कि 1989 से 1997 तक कार्यरत दैनिक भोगी श्रमिकों का नियमितीकरण किया गया है लेकिन आज पर्यंत तक 1997 के बाद सालों बीत जाने पर भी हजारों की तादाद में काम कर रहे। छोटे वर्ग के कर्मचारियों का नियमितीकरण नहीं हुआ है नाही उनकी वेतन वृद्धि हुई है।

सभी दैनिक वेतन श्रमिकों का कहना है कि चुनाव के पहले भूपेश सरकार ने अपने घोषणापत्र में लोकलुभावन वाले अनेक वादे किए थे की 10 दिन के भीतर ही सभी कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जावेगा, जॉब सुरक्षा प्रदान करेंगे तथा किसी भी कर्मचारी की छटनी नहीं की जावेगी। वर्तमान वस्तु स्थिति को देखते हुए जहां चुनाव में महज तीन से चार माह ही रह गए हैं। लेकिन इन कर्मचारियों की स्थिति से राज्य सरकार को सरोकार ही नहीं है। जिसे लेकर जिलेभर के चतुर्थवर्गीय कर्मचारी संघ पूर्ण हड़ताल अनिश्चितकालीन धरने पर जाने को मजबूर हैं। जिसकी जवाबदेही छत्तीसगढ़ राज्य शासन की होगी।

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