spot_img
spot_img
spot_img
Monday, March 23, 2026

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के सफल आयोजन से धन्य हो गई रायगढ़ की धरा आयोजकों व श्रोताओं का आभार -अनिल शुक्ला

spot_img
Must Read

रायगढ़ / 

IMG-20260206-WA0024
IMG-20260205-WA0013
IMG-20260203-WA0014
IMG-20260203-WA0016
IMG-20260203-WA0015

रायगढ़ जिले कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अनिल शुक्ला ने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 1 से 3 जून को आयोजित राष्ट्रीय रामायण महोत्सव की सफलता पर आभार जताते हुए प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल जी का रामायण महोत्सव आयोजन हेतु रायगढ़ के रामलीला मैदान का चयन करने हेतु सर्वप्रथम हृदय से साधुवाद व छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से आयोजक सांस्कृतिक विभाग ,जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन,कार्यक्रम से जुड़े विभिन्न धर्मों के समाज सेवी गणमान्य नागरिकों, साज सज्जा मंच व पंडाल व्यवस्था से जुड़े कर्मी ,प्रिन्ट मीडिया , इलेट्रानिक मीडिया,पोर्टल न्यूज़ के प्रतिनिधियों व विशेष रूप से आस्थावान दर्शकों का जिन्होंने बड़ी शांति उत्सुकता व गंभीरता से कार्यक्रम को सुना उन सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
अनिल शुकला ने कार्यक्रम के बारे में बताया सांस्कृतिक विभाग द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में कार्यक्रम में देश विदेश से आए कलाकारों ने शिरकत की केलो महाआरती भजन कीर्तन कंबोडिया व इंडोनेशिया के रामायण दल की प्रस्तुति अतिथि भजन गायकों सम्मुख प्रिया, बाबा हंसराज रघुवंशी, लखवीर सिंह लक्खा ,शरद वर्मा,मैथली ठाकुर व सुप्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास सह अन्य कलाकारों के उम्दा प्रदर्शन ने ऐसा समां बांधा कि यह तीन दिवसीय कार्यक्रम ऐतिहासिक बन गया है। समूचा शहर राम भक्ति में लीन नजर आया वही स्थानीय, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर की मीडिया ने भी भरपूर कवरेज देते हुए इस सम्पूर्ण तीन दिवसीय कार्यक्रम की पल-पल की खबरें लोगों तक पहुंचाई | राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के इस सफल आयोजन में शासन प्रशासन द्वारा चुस्त दुरुस्त व्यवस्था रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अनिल शुक्ला ने बताया प्रभु श्रीराम हमारे दिलों में हैं, हमारे जीवन में हैं। राम नाम का रस ही ऐसा है, जितना सुनिएगा, जितना मनन करिएगा, राम रस की प्यास उतनी बढ़ती जाती है। हमारे राम कौशल्या के राम, वनवासी राम, शबरी के राम, हमारे भांचा राम और हम सबके राम हैं। तीन दिनों तक चले इस महोत्सव में रायगढ़ राममयगढ़ हो गया। इस महोत्सव में नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। तीन दिनों तक पंडाल खचाखच भरा रहा। बड़ी संख्या में पड़ोसी राज्यों से भी इस महोत्सव में शामिल होने के लिए मेहमान आए। उन्होंने कहा कि इस दौरान जो भी कोई एक दूसरे से मिला सभी दोहे और चौपाई गुनगुनाते मिले।अनिल शुक्ला ने बताया पौराणिक कथाओं के अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता बस्तर के रास्ते गुजरते हुए दक्षिण भारत पहुंचे थे. छत्तीसगढ़के बस्तर में हर नाम में हैं राम, दंडकारण्य के ये प्रमुख स्थल हैं प्रभु श्रीराम के धाम
बस्तर राम वन गमन पथ
छत्तीसगढ़ का दंडकारण्य क्षेत्र कहा जाना वाला बस्तर भगवान राम से बेहद घनिष्टता से जुड़ा है. भगवान राम का 14 साल के वनवास से गहरा नाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता बस्तर के रास्ते गुजरते हुए दक्षिण भारत पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने बस्तर के चित्रकोट, तीरथगढ़ वाटरफॉल और बस्तर की ऐतिहासिक धरोहर दलपत सागर और रामपाल मंदिर में समय भी गुजारा था और आज भी इन जगहों में भगवान राम के आने के प्रमाण मिलते हैं.
वनवास के चौथे चरण में पहुंचे बस्तर
दरअसल, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम लंबे समय तक बस्तर में रहे. श्रीराम अपने वनवास के चौथे चरण में बस्तर के दंडकारण्य पहुंचे थे. भगवान राम धमतरी से कांकेर, कांकेर से रामपुर, जुनवानी, केशकाल घाटी शिव मंदिर, राकसहाड़ा, नारायणपुर, चित्रकोट शिव मंदिर, तीरथगढ़ वाटरफॉल , सीताकुंड, रामपाल मंदिर, कोटी माहेश्वरी, कुटुंबसर गुफा और ओडिशा के मलकानगिरी गुप्तेश्वर और सुकमा जिले के रामाराम मंदिर समेत कोंटा में श्रीराम ने वनवास के दिनों में यहां से होकर दक्षिण भारत के लिए प्रस्थान किया था.
दंडकारण्य में बिताया समय
बस्तर में राम वनगमन पथ को लेकर शोध कर रहे शोधकर्ता के अनुसात भगवान श्रीराम ने अपने 14 साल के वनवास के दौरान दंडकारण्य में अपना ज्यादा समय बिताया था. भगवान ने राम वनवास के तीसरे पड़ाव में अत्रि ऋषि के आश्रम में कुछ दिन रुकने के बाद, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के घने जंगलों को अपना आश्रय बनाया. ये जंगल क्षेत्र था दंडकारण्य. कांकेर से होते हुए भगवान राम, लक्ष्मण और सीता माता चित्रकोट जलप्रपात पहुंचे. जब चित्रकोट पहुंचे तो यहां ऋषि मुनियों के आश्रम में राम भगवान, सीता माता और लक्ष्मण ने अपना कुछ समय बिताया, इस दौरान एक शिवलिंग की स्थापना की, जहां अब एक भव्य मंदिर बन गया है. हर साल शिवरात्रि के समय चित्रकोट में एक मेला भी लगता है. जिसमें दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं.। अनिल शुक्ला ने बताया कि छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय माननीय भूपेश बघेल ने इन सभी स्थलों को तीर्थ का स्वरूप देने के उद्देश्य से प्रभु श्रीराम के वन गमन के दौरान प्रमाणित तौर पर उनके चरण जिन जिन स्थलों पर पड़े थे उन सभी जगहों को एक सूत्र में पिरोकर राम वन गमन पथ की कार्य योजना तैयार कर तीव्र गति से उस पर कार्य भी प्रारम्भ कर दिया गया है और आस्था के इन स्थलों पर धर्मिक तीर्थ के लिए पर्यटन की कार्य योजना पर भी तेजी से कम चल रहा है।
अनिल शुक्ला ने रायगढ़ के रामझरना शिवरीनारायण के बारे में और आरंग के पास चंद्रखुरी जो माता कौशल्या की जन्मस्थली है के विषय मे प्रकाश डालते हुए अनिल शुक्ला ने बताया पौराणिक कथाओं के अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता बस्तर के रास्ते गुजरते हुए दक्षिण भारत पहुंचे थे. छत्तीसगढ़के बस्तर में हर नाम में हैं राम, दंडकारण्य के ये प्रमुख स्थल हैं प्रभु श्रीराम के धाम
बस्तर राम वन गमन पथ
छत्तीसगढ़ का दंडकारण्य क्षेत्र कहा जाना वाला बस्तर भगवान राम से बेहद घनिष्टता से जुड़ा है. भगवान राम का 14 साल के वनवास से गहरा नाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता बस्तर के रास्ते गुजरते हुए दक्षिण भारत पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने बस्तर के चित्रकोट, तीरथगढ़ वाटरफॉल और बस्तर की ऐतिहासिक धरोहर दलपत सागर और रामपाल मंदिर में समय भी गुजारा था और आज भी इन जगहों में भगवान राम के आने के प्रमाण मिलते हैं.
वनवास के चौथे चरण में पहुंचे बस्तर
दरअसल, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम लंबे समय तक बस्तर में रहे. श्रीराम अपने वनवास के चौथे चरण में बस्तर के दंडकारण्य पहुंचे थे,भगवान राम धमतरी से कांकेर, कांकेर से रामपुर, जुनवानी, केशकाल घाटी शिव मंदिर, राकसहाड़ा, नारायणपुर, चित्रकोट शिव मंदिर, तीरथगढ़ वाटरफॉल , सीताकुंड,रामपाल मंदिर, कोटी माहेश्वरी, कुटुंबसर गुफा और ओडिशा के मलकानगिरी गुप्तेश्वर और सुकमा जिले के रामाराम मंदिर समेत कोंटा में श्रीराम ने वनवास के दिनों में यहां से होकर दक्षिण भारत के लिए प्रस्थान किया था.
दंडकारण्य में बिताया समय
बस्तर में राम वनगमन पथ को लेकर शोध कर रहे शोधकर्ता के अनुसात भगवान श्रीराम ने अपने 14 साल के वनवास के दौरान दंडकारण्य में अपना ज्यादा समय बिताया था,भगवान ने राम वनवास के तीसरे पड़ाव में अत्रि ऋषि के आश्रम में कुछ दिन रुकने के बाद, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के घने जंगलों को अपना आश्रय बनाया. ये जंगल क्षेत्र था दंडकारण्य. कांकेर से होते हुए भगवान राम,लक्ष्मण और सीता माता चित्रकोट जलप्रपात पहुंचे. जब चित्रकोट पहुंचे तो यहां ऋषि मुनियों के आश्रम में राम भगवान, सीता माता और लक्ष्मण ने अपना कुछ समय बिताया, इस दौरान एक शिवलिंग की स्थापना की, जहां अब एक भव्य मंदिर बन गया है. हर साल शिवरात्रि के समय चित्रकोट में एक मेला भी लगता है. जिसमें दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं.।
अनिल शुक्ला ने बताया कि छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री माननीय माननीय भूपेश बघेल ने इन सभी स्थलों को तीर्थ का स्वरूप देने के उद्देश्य से प्रभु श्रीराम के वन गमन के दौरान प्रमाणित तौर पर उनके चरण जिन जिन स्थलों पर पड़े थे उन सभी जगहों को एक सूत्र में पिरोकर राम वन गमन पथ की कार्य योजना तैयार कर तीव्र गति से उस पर कार्य भी प्रारम्भ कर दिया गया है और आस्था के इन स्थलों पर धर्मिक तीर्थ के लिए पर्यटन की कार्य योजना पर भी तेजी से कम चल रहा है।
अनिल शुक्ला ने रायगढ़ के रामझरना शिवरीनारायण और आरंग के पास चंद्रखुरी जो माता कौशल्या की जन्मस्थली है इस लिहाज से प्रभु श्रीराम का ननिहाल हुआ छत्तीसगढ़ और साथ ही हम सब का भांजे का रिश्ता भी हुआ प्रभु राम से।वहीं रामझरना के बारे में कहा जाता है पौराणिक मान्यता है कि रामचंद्र 14 वर्ष के वनवास के समय पत्नी सीता व भाई लक्ष्मण के साथ यहां आये थे, तब सीता माता को प्यास लगी। भगवान राम ने बाण से धरती भेदकर सीता की प्यास बुझाई, तब से यहां जल की धारा अनवरत बह रही है। बताया जाता है कि यहां का पानी पीने से शरीर का आंतरिक व बाह्य रोग से लोगों को मुक्ति मिलती है। पूरे अंचल में इस प्राकृतिक जलधारा से निकले जल को पवित्र व सबसे शुद्ध माना जाता है। जल कुंड से निकलने वाला पानी आगे चलकर बड़े जलाशय में समाहित हो जाता है,शिवरीनारायण
छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले की सीमा पर तीन नदियों के संगम स्थली पर बसा शिवरीनारायण रामायण कालीन घटनाओं से जुड़ा है. मान्यता के अनुसार वनवास काल के दौरान यहां प्रभु राम ने शबरी के जूठे बेर खाए थे. शिवरीनारायण के विकास के लिए राज्य सरकार ने नई योजना तैयार की है. सरकार ने यहां विकास के लिए 37 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की है.राम कथा में कई प्रसंगों में श्री राम के वन गमन व सीता माता की खोज के दौरान विभिन्न समुदायों के लोगों का जिक्र है जो उनके उद्देश्य पूर्ति में साथ जुड़ते चले जाते हैं। चाहे वह निषादराज हों जो वनवास में जा रहे श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा जी पार करवाते हैं या शबरी जिन्होंने सीता की खोज में निकले श्री राम को प्रेम से बेर खिलाए और आगे की राह बताई।
अनिल शुक्ला ने बताया कि इन सभी बिषयों को एक सूत्र में पिरोकर छत्तीसगढ़ बहुत बड़ा राम तीर्थ स्थली बन जायेगा राम वन गमन पथ पूर्ण होते ही

IMG_20260205_223617
IMG_20260205_223649
IMG-20260204-WA0012
IMG-20260205-WA0010
IMG-20260204-WA0015
IMG-20260204-WA0023
IMG-20260205-WA0011
IMG_20260205_223120
IMG-20260205-WA0015
IMG-20260205-WA0014
IMG-20260204-WA0013
IMG-20260204-WA0011
spot_img
spot_img
spot_img
spot_img
Latest News

रायगढ़ बना अफीम का अड्डा – सरकार सो रही, माफिया बो रहे जहर!”- आशीष जायसवाल

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में तमनार के बाद अब लैलूंगा में लगातार अवैध अफीम की खेती का पकड़ा...

More Articles Like This

error: Content is protected !!