रायगढ़ / मेडिकल कॉलेज रोड के आगे अस्पताल से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को यूं ही खुली जगहों पर फेक दिया जा रहा है जिससे अनेक प्रकार की बीमारियां भी उत्पन्न होंगी। लोगों को संक्रमण का खतरा भी हमेशा बना रहेगा। लगातार अखबारों की यह खबर सुर्खियां भी बनी हुई है। लेकिन जिम्मेदार विभाग के कान में जू तक नहीं रेंगती। कई महीनों से इसी तरीके से इन बदबूदार कचरा को इधर-उधर कहीं भी फेंक दिया जा रहा है। यूं तो शहर से काफी दूर भी होने के कारण भी इस बात का फायदा अस्पताल प्रबंधन उठा रहा है। मनमाना कहीं भी इसे डिस्पोज किया जा रहा है। लेकिन इस रास्ते से सैकड़ों की संख्या में लोगों का आना जाना होता है।

आने जाने वालों राहगीरों को हो रही परेशानी…
मेडिकल कॉलेज रोड नजदीकी अस्पताल एमसीएच ही है, कचरे के साथ-साथ मेडिकल के अनेक खाद्य पदार्थ, आपरेशन करने के बाद शरीर के पार्ट्स को पॉलीथिन में भर कर रखना चाहिए। जिससे सुरक्षा एजेंसी के कर्मचारी ग्लब्स, सेफ्टी जूते आदि पहनकर पूरी सुरक्षा मानक पालन करते हुए उठाव करते। बायोमेडिकल गंदगी का सही तरीके से निपटारा नहीं किया जा रहा है। जो यह महामारी को उत्पन्न कर सकता है। यह कोई पहला मामला नहीं है अनेक ऐसे मामले है। यह अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है की वह कचरे को किस प्रकार उसे निपटारा करती है।

निडिल, कांच की शीशीया, इंजेक्शन, बीच सड़क पर…

इंजेक्शन, निडिल, कांच की शीशीया, मरीजों के गंदे कपड़े, खुली इंजेक्शन, टिशू, पूरे रास्ते पर पड़े हुए हैं जो आज पर्यंत तक भी देखे जा सकते हैं बायोवेस्ट के निस्तारण निर्धारित प्रोटोकॉल अस्पताल की ओर से नहीं की जा रही है। यही कचरा को जला दिया जाता है जिससे वातावरण प्रदूषित के साथ जहरीली धुआं आसपास के इलाकों में फैल जाती है इससे संक्रमण होने का खतरा हमेशा बना रहता है।







