गलघोटू टीकाकरण के नाम पर लापरवाही की इंतहा: 40 दिन बाद तड़प-तड़प कर मर रहे बेज़ुबान बछड़े — तारेन्द्र डनसेना

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कांग्रेस सरकार के स्वावलंबी ‘गौठानों’ की अनदेखी कर सिर्फ नाम बदलकर ‘गौधाम’ करने वाली वर्तमान सरकार की व्यवस्था पूरी तरह फेल।

40 दिन पहले लगे गलघोटू (HS) टीके के बाद गाँवों में फैला लम्पी संक्रमण; बछड़ों की हो रही मौत पर पशुपालन विभाग साधे है चुप्पी।

प्रभावित गाँवों में तत्काल डॉक्टरों की टीम भेजने, उच्च स्तरीय जांच और पीड़ित पशुपालकों को मुआवजे की मांग।

रायगढ़ / जिला कांग्रेस कमेटी रायगढ़(ग्रामीण) के प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने पशुपालन विभाग और वर्तमान राज्य सरकार की घोर अकर्मण्यता पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि रायगढ़ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विभागीय लापरवाही और घटिया व्यवस्था के कारण पशुपालक और किसान खून के आँसू रोने को मजबूर हैं।

तारेन्द्र डनसेना ने बताया कि लगभग 40 दिन पूर्व पशुपालन विभाग की टीम ने गाँवों में पशुओं को गलघोटू (HS) बीमारी से बचाने के लिए टीकाकरण किया था। किसानों को उम्मीद थी कि इससे उनके मवेशी सुरक्षित रहेंगे, लेकिन टीकाकरण के ठीक बाद ग्रामीण इलाकों में लम्पी स्किन डिज़ीज़ (Lumpy Skin Disease) महामारी की तरह फैल गई। यह संक्रमण विशेष रूप से छोटे, मासूम और नाज़ुक बछड़ों को अपना निशाना बना रहा है।

गौठान vs गौधाम: नाम बदला, पर जमीनी व्यवस्थाएं ध्वस्त

कांग्रेस प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने वर्तमान सरकार की नीतियों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि “पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत गाँव-गाँव में ‘गौठान’ बनाए थे, जहाँ पशुओं के मुफ़्त चारे, पानी, नियमित स्वास्थ्य जांच और गोबर खरीद की पुख्ता व्यवस्था थी। महिला स्व-सहायता समूहों और पशु डॉक्टरों की देखरेख में मवेशी सुरक्षित रहते थे।”

उन्होंने आगे कहा, “वर्तमान सरकार ने आते ही पूर्व सरकार की इन जनकल्याणकारी योजनाओं को बंद या निष्क्रिय कर दिया। अब केवल नाम बदलकर ‘गौधाम’ जैसी घोषणाएं की जा रही हैं, लेकिन धरातल पर न तो डॉक्टरों की उपस्थिति है, न दवाइयां हैं और न ही बीमार मवेशियों की सुध लेने वाला कोई है। कागजी ‘गौधाम’ के चक्कर में आज ग्रामीण क्षेत्रों का पशुधन भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।”

लापरवाही का आलम और बेज़ुबानों की मौत:

डनसेना ने कहा कि टीका लगने के बाद से ही बछड़ों की हालत बिगड़ने लगी। उनके शरीर पर गांठें उभर आई हैं, वे तेज बुखार से तड़प रहे हैं और उन्होंने खाना-पीना छोड़ दिया है। देखते ही देखते दर्जनों बछड़े दम तोड़ चुके हैं, जिससे गरीब किसानों की मेहनत और आजीविका चौपट हो गई है। पिछले 40 दिनों से पशुपालक अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन विभाग जांच करने के बजाय चुप्पी साधे बैठा है।

तारेन्द्र डनसेना (प्रवक्ता, जिला कांग्रेस कमेटी रायगढ़) की प्रमुख मांगें:

1. तत्काल आपातकालीन चिकित्सा: [यहाँ गाँव/ब्लॉक का नाम लिखें] और आसपास के सभी प्रभावित इलाकों में विशेषज्ञ पशु डॉक्टरों की टीम तुरंत भेजी जाए और बीमार बछड़ों का मुफ्त इलाज किया जाए।

2. उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच: 40 दिन पहले हुए गलघोटू टीकाकरण अभियान और उसके बाद उपजे लम्पी वायरस के मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए—ताकि स्पष्ट हो सके कि लापरवाही वैक्सीन की गुणवत्ता/कोल्ड चेन में थी या टीकाकरण के तरीके में।

3. लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई: इस गंभीर मामले को दबाने और समय पर इलाज उपलब्ध न कराने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई हो।

4. किसानों को आर्थिक मुआवजा: जिन किसानों और पशुपालकों ने अपने बछड़े खोए हैं, उन्हें शासन द्वारा प्रति बछड़ा उचित आर्थिक मुआवजा दिया जाए।

तारेन्द्र डनसेना ने चेतावनी दी कि यदि 24 से 48 घंटे के भीतर पशुपालन विभाग ने जमीनी स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए, तो कांग्रेस पार्टी किसानों और पशुपालकों के हक के लिए उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होगी।

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