मशीन से धान रोपाई को किसानों ने बताया फायदेमंद, विद्यार्थियों ने भी किया प्रैक्टिकल…जिंदल पावर द्वारा किसानों को कम समय और लागत में खेती करने किया जा रहा प्रेरित

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6 अगस्त रायगढ़। तमनार क्षेत्र के किसानों को कम लागत और कम समय में धान के अधिक उत्पादन का उपाय जिंदल पावर के जिंदल फाउंडेशन द्वारा बताया जा रहा है। गुरूवार को तमनार में मशीन से श्रीविधि से रोपाई का प्रदर्शन किसान के खेत में किया गया। 

क्षेत्र में खेती किसानी का काम इन दिनों प्रगति पर है। जिंदल पावर प्लांट क्षेत्र के किसानों की आय को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इस दिशा में खेती की नई- नई तकनिकों की जानकारी भी किसानों को दी जा रही है साथ ही आधुनिक खेती के लिए उपाय भी बताए जा रहे हैं। जिंदल फाउंडेशन द्वारा मई माह में क्षे़त्र के किसानों को आधुनिक तकनीक से खेती करने का प्रशिक्षण दिया गया था। उस समय किसानों को मशीन से धान के बीज को रोपा के लिए तैयारी करने की विधि बताई गई थी। जिंदल फाउंडेशन द्वारा करीब पांच एकड़ से अधिक जमीन पर रोपा लगाने के लिए नर्सरी लगाई गई थी। नर्सरी तैयार हो जाने के बाद गुरूवार 6 अगस्त को मशीन से रोपाई का प्रदर्शन किया गया और खेत में रोपा लगाया गया। 

मशीन से पौधा से पौधा और कतार से कतार की दूरी तय

श्रीविधि से धान की रोपाई का प्रदर्शन किया गया। धान की नर्सरी को प्लेट से निकाल कर सीधा मशीन के प्लेट में पौधों को डाला गया इसके बाद मशीन द्वारा ही खेत में रोपाई की गई। इस विधि से धान के पौधों से पौधा की दूरी और कतार से कतार की दूरी पूरी तरह से बराबर है। इससे पौधों को ग्रोथ करने के लिए पर्याप्त जगह मिलेगी, जिससे धान के पौधों के कंसों अधिक आएंगे इससे उत्पादन भी बढ़ेगा। साथ ही मशीन से रोपाई होने के कारण मजदूर भी कम लगेंगे अर्थात लागत भी कम आएगी। एक मशीन एक घंटा में करीब तीन एकड़ खेत में रोपाई कर सकती है। इस अवसर पर कृषि प्रभारी सीएसआर सुरेश डनसेना सहित क्षेत्र के किसान व विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

एग्रीकल्चर के विद्यार्थियों ने बताया फायदेमंद

धान की नर्सरी आदर्श ग्राम्य भारती स्कूल परिसर में लगाई गई थी। इससे यहां कि एग्रीकल्चर विषय लेकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल करने का भी मौका मिला। स्कूल की एग्रीकल्चर की छात्रा, अल्पना, भाग्य लक्ष्मी और सुमन ने बताया कि जिंदल फाउंडेशन द्वारा धान की नर्सरी तैयार करने और श्रीविधि से धान की रोपाई करने का तरीका बताया गया। उसे प्रत्यक्ष देखकर उन्हें बहुत जानकारी प्राप्त हुई। उन्होंने बताया कि यह जानकारी उनकी पढ़ाई के लिए फायदेमंद होगी। स्कूल के संचालक लक्ष्मीनारायण चौधरी ने बताया कि एग्रीकल्चर विभाग के विद्यार्थियों के लिए बहुत उपयोगी रहा। व्याख्याता मनोज सोनवानी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया व विधि को एग्रीकल्चर के विद्यार्थियों ने जाना यह उनके लिए प्रैक्टिकल था, जिसका फायदा उन्हें मिलेगा। 

फ्लाई ऐश और वर्मी कंपोस्ट का बेहतरीन उपयोग

इस योजना की को आॅर्डिनेटर तमा यादव ने बताया कि नर्सरी लगाने के लिए फ्लाई ऐश का उपयोग किया गया था, जिसका परिणाम बेहतरीन रहा है। षत प्रतिशत पौधे उगे साथ ही पौधों को ग्रोथ भी पर्याप्त मिला। उन्होंने बताया कि फ्लाई ऐश 15 किलो, 5 किलो वर्मी कंपोस्ट 7 किलो भुरभूरी मिट्टी का लेयर बनाया गया था। जिसमें उपचारित बीज को डाला गया। इसका परिणाम बेहतरीन रहा है।

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