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Saturday, August 15, 2026

पोरडा–चिमटापानी परियोजना पर पहली बड़ी दस्तक…सर्वे रोकने की मांग को लेकर SDM घरघोड़ा को सौंपा विस्तृत ज्ञापन उस्मान बेग के नेतृत्व में प्रभावित ग्राम वाशियों ने भरी हुंकार 

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घरघोड़ा/रायगढ़ / रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड अंतर्गत प्रस्तावित पोरडा–चिमटापानी कोल परियोजना को लेकर अब प्रभावित क्षेत्र में जनचर्चा तेज हो गई है। इस परियोजना के अंतर्गत पोरडा, कठरापाली, कांटाझरिया, सिंघनपुर, कोनपारा एवं चिमटापानी सहित कई ग्रामों की कृषि भूमि अधिग्रहित की जानी प्रस्तावित है। परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण एवं सर्वेक्षण प्रक्रिया प्रारंभ करने की तैयारियां चल रही हैं, जिससे हजारों प्रभावित ग्रामवासियों के सामने अपने भविष्य, आजीविका, पुनर्वास, रोजगार, पर्यावरण एवं सामाजिक अस्तित्व को लेकर अनेक प्रश्न खड़े हो गए हैं।

इन्हीं मुद्दों को लेकर कठरापाली, कांटाझरिया, सिंघनपुर, कोनपारा एवं चिमटापानी के प्रभावित ग्रामवासियों ने एकजुट होकर युवा कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष रायगढ़ एवं पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष घरघोड़ा उस्मान बेग के नेतृत्व में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) घरघोड़ा एवं तहसीलदार घरघोड़ा को विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि जब तक प्रभावित ग्रामवासियों की सभी जायज मांगों पर स्पष्ट एवं लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक किसी भी प्रकार का भूमि सर्वेक्षण अथवा परियोजना संबंधी कार्य प्रारंभ नहीं किया जाए।

प्रभावित ग्रामवासियों ने बताया कि वर्ष 2025 में केवल पोरडा ग्राम में सर्वेक्षण किया गया था, लेकिन आज तक परियोजना की वास्तविक स्थिति, प्रभावित परिवारों की सूची, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया, मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर न तो स्पष्ट जानकारी दी गई और न ही प्रभावित ग्रामवासियों को विश्वास में लिया गया। ऐसे में अन्य गांवों में सर्वेक्षण प्रारंभ करना उचित नहीं होगा।

ज्ञापन में सर्वप्रथम मांग की गई कि प्रत्येक भूमि स्वामी को अपनी भूमि का बंटांकन (विभाजन) एवं राजस्व अभिलेखों को दुरुस्त कराने का पर्याप्त अवसर दिया जाए तथा उसके बाद ही किसी भी प्रकार की सर्वेक्षण प्रक्रिया प्रारंभ की जाए।

इसके साथ ही परियोजना से संबंधित सभी जानकारियां SECL द्वारा पूर्ण पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक की जाएं, ताकि प्रत्येक प्रभावित ग्रामवासी यह जान सके कि उसकी कितनी भूमि अधिग्रहित होगी, उसे कितना मुआवजा मिलेगा, पुनर्वास कहां किया जाएगा तथा परियोजना का वास्तविक स्वरूप क्या है।

प्रभावित ग्रामवासियों ने यह भी मांग की कि भूमि अधिग्रहण से पूर्व मुआवजा नीति का पुनर्मूल्यांकन किया जाए तथा वर्तमान बाजार मूल्य के अनुरूप कम से कम चार गुना मुआवजा निर्धारित किया जाए। साथ ही मकान, पेड़, कुआं, बोरवेल, फसल एवं अन्य सभी स्थायी परिसंपत्तियों का अलग-अलग मूल्यांकन कर उनका पूर्ण मुआवजा दिया जाए तथा संपूर्ण भुगतान एकमुश्त एवं समयबद्ध तरीके से किया जाए।

ज्ञापन में आगे कहा गया कि प्रत्येक प्रभावित परिवार के कम से कम एक सदस्य को स्थायी रोजगार दिया जाए। परियोजना के साथ-साथ ठेका एवं आउटसोर्सिंग कार्यों में भी स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देते हुए कम से कम 70 प्रतिशत रोजगार स्थानीय लोगों को उपलब्ध कराया जाए।

प्रभावित ग्रामवासियों ने पुनर्वास को लेकर भी स्पष्ट मांग रखी कि सभी विस्थापित परिवारों के लिए पक्का मकान, आवासीय भूखंड, पेयजल, बिजली, सड़क, विद्यालय, आंगनवाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र सहित सभी मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा पूरे गांव का पुनर्वास एक साथ किया जाए, ताकि सामाजिक एवं सांस्कृतिक एकता बनी रहे।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जिन परिवारों के वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत दावे लंबित हैं, उनका निराकरण किए बिना किसी भी प्रकार का भूमि अधिग्रहण अथवा सर्वेक्षण कार्य प्रारंभ न किया जाए।

इसके अतिरिक्त प्रभावित ग्रामवासियों ने मांग की कि उपरोक्त सभी शर्तों एवं मांगों को ग्रामसभा की उपस्थिति में लिखित समझौते (एमओयू) का हिस्सा बनाया जाए तथा ग्रामसभा की पूर्व सहमति के बिना किसी भी प्रकार का सर्वेक्षण, भूमि अधिग्रहण अथवा परियोजना संबंधी कार्य प्रारंभ न किया जाए।

युवा कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष रायगढ़ एवं पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष घरघोड़ा उस्मान बेग ने कहा कि 

“हम विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर प्रभावित ग्रामवासियों के संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों का हनन किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। प्रशासन एवं SECL पहले यह स्पष्ट करें कि प्रत्येक प्रभावित परिवार को कितना मुआवजा मिलेगा, प्रति परिवार रोजगार की क्या नीति होगी, पुनर्वास कहां किया जाएगा तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या ठोस व्यवस्था की जाएगी। इन सभी विषयों पर प्रभावित ग्रामवासियों के साथ लिखित सहमति और स्पष्ट निर्णय के बाद ही आगे की प्रक्रिया बढ़ाई जानी चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा “आज सौंपा गया यह ज्ञापन केवल एक आवेदन नहीं है, बल्कि प्रभावित ग्रामवासियों के अधिकारों की लड़ाई की पहली संगठित शुरुआत है। यह किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं, बल्कि जल, जंगल, जमीन, सम्मान, भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के अधिकारों की लड़ाई है। यदि प्रशासन एवं परियोजना प्रबंधन ने समय रहते प्रभावित ग्रामवासियों की जायज मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो यही शुरुआत आगे चलकर एक बड़े, व्यापक और लोकतांत्रिक जनआंदोलन का रूप लेगी।”

ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर रायगढ़, महाप्रबंधक SECL रायगढ़ क्षेत्र, पुलिस अधीक्षक रायगढ़, तहसीलदार घरघोड़ा, क्षेत्रीय महाप्रबंधक बरौद–बिजारी क्षेत्र एवं थाना प्रभारी घरघोड़ा को भी प्रेषित की गई।

अब पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन और SECL के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रभावित ग्रामवासियों द्वारा उठाई गई इन मांगों पर प्रशासन और परियोजना प्रबंधन कितना गंभीर रुख अपनाते हैं। फिलहाल इतना तय है कि पोरडा–चिमटापानी कोल परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामवासियों ने अपने अधिकारों की लड़ाई की पहली मजबूत दस्तक दे दी है, और आने वाले दिनों में इस मुद्दे की दिशा प्रशासन के निर्णय पर निर्भर करेगी।

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