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Friday, June 19, 2026

मेडागास्कर विधि से समय की बचत और धान की खेती में लागत भी कम: एक्सपर्ट…किसानों को दिया गया प्रशिक्षण, जिंदल फाउंडेशन द्वारा किसानों को खेती के बताए गए उपाय

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18 जून रायगढ़। धान की फसल में लागत बढ़ती जा रही है, वहीं काम करने वाले मजदूरों की कमी होती जा रही है, ऐसे समय में कम लागत और कम समय में खेती करने के तरीके बताने के लिए जिंदल फाउंडेशन द्वारा दो दिवसीय किसान प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कृशि विज्ञान केंद्र के एक्सपर्ट द्वारा किसानों को बताया गया कि मेडागास्कर (कतार बोनी) विधि से धान की बोआई करने से समय की भी बचत होती है और किसानों को खर्च भी कम आता है। एक्सपर्ट द्वारा किसानों को मनीष से रोपाई करने के लिए डेमो भी बताया गया।

खरीफ की खेती का दिन आ गया है, किसान अपने खेतों को तैयार करने में लगे हैं ऐसे समय में किसानों को खेती के लिए सही मार्गदर्शक की आवश्यकता है। जिंदल फाउंडेशन द्वारा अपने कार्पोरेट सोशल रिस्पांस्बिलिटी के तहत दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन कुवोटा और षक्तिमान कंपनियों के सहयोग से तमनार में किया गया। जिसमें कृशि विज्ञान केंद्र रायगढ़ के कृशि वैज्ञानिक डाॅ केके पैकरा और डाॅ केएन पटेल ने जानकारी दी। कंपनी के इंजीनियरों ने बताया कि रोपाई से पहले मिटृटी को पहले रोटावेटर चलाकर भुरभुरी कर लें वह पाउडर की तरह हो जाए उसके बाद भुरभुरी मिटृटी को ट्रे में डालें। उसी ट्रे में मषीन से बीजों को डाला जाता है। उन्होंने बताया कि जरूरत के अनुसार ही मनीष ट्रे में बीज गिराती है। इसके बाद उपचारित बीज को व्यवस्थित रखा जाता है करीब 15 से 20 दिनों के अंदर वह बीज ट्रांसप्लांट के लायक हो जाता है। इसके बाद पेडी ट्रांसप्लांट मनीष से लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मषीन एक दिन में कम से कम 6 एकड़ खेत में रोपाई कर सकती है। इससे समय की बचत होती है। सीएसआर टीम के सुरेश डनसेना ने बताया कि किसानों के लिए जरूरी बेलर मषीन, राउंड बेलर, स्कवेयर बेलर, इस्ट्रा रिपर, स्लेसर, हेरेक, बूम स्प्रे मषीन, प्लाफ रोटावेटर बाजार से कम दर पर किराए में मिल सकती है। इसके लिए किसानों को एफपीओ से संपर्क करना होगा।

लागत और लेबर भी कम लगता है

एक्सपर्ट ने बताया कि इस तरह जमीन को पहले से तैयार कर मषीन से बुआई करने पर लागत भी कम आती है। अधिकतम तीन से पांच लीटर डीजल का खर्च प्रति एकड़ आता है, जबकि लेबर से रोपाई कराने पर अधिक खर्च आता है। पौधे से पौधे की दूरी और लाइन से लाइन की दूरी भी बराबर होती है, इससे पौधों को ग्रो करने के लिए पर्याप्त जगह मिल जाती है।

न जलाएं पराली जलाने से खेतों में आर्गेनिक कार्बन की कमी हो जाती है

किसानों को बताया गया कि पराली को जला देने से खेतों में आर्गेनिक कार्बन की कमी हो जाती है, इसलिए उसे जलाने के बजाय डिकंपोज करना चाहिए। किसानों को बताया गया कि बूम स्प्रे मनीष की चैड़ाई 20 फीट से अधिक होती है, एक बार में इतने बड़े एरिया को कवर कर लेता है। बूम स्प्रे से पराली को डिकंपोज किया जा सकता है। इसके बाद पराली से खाद बनती है।

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