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Thursday, March 19, 2026

जिंदल पावर लिमिटेड तमनार में ’मियांवाकी पद्धति’ से सघन वृक्षारोपण अभियान…कर्मचारियों ने मियांवाकी पद्धति से वृक्षारोपण कर हरित वसुधा की रखी नींव

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तमनार- जिंदल पावर लिमिटेड तमनार एक पर्यातिहैषी संस्थान होने के नाते क्षेत्र में पर्यावरणीय वातावरण निर्माण में सदैव बढ़ चढ़कर भाग लेती रही है तथा शासन के प्रत्येक योजनाओं में अपनी भूमिका का निर्वहन करती रही है। इसी क्रम में संस्थान के पर्यावरण प्रबंधन विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सार्थक पहल करते हुए मियांवाकी पद्धति से सघन वृक्षारोपण अभियान की शुभारंभ किया गया। मियांवाकी पद्धति से पौधरोपण भविष्य की पीढ़ियों के लिए हरित धरोहर तैयार करने के साथ साथ आने वाले समय में वनों की कमी को पूरा करने का सबसे प्रभावी व शसक्त माध्यम है।  

वृृक्षारोपण अभियान जी. वेंकट रेड्डी, कार्यपालन निदेशक एवं संयंत्र प्रमुख, जेपीएल तमनार के मुख्य आतिथ्य में, गजेन्द्र रावत, कार्यकारी उपाध्यक्ष, ए.के. तिवारी, कार्यकारी उपाध्यक्ष, संदीप सांगवान उपाध्यक्ष, एन.के. सिंह, उपाध्यक्ष जेपीएल तमनार एवं विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों के विशिष्ठ आतिथ्य में संयंत्र में कार्यरत अधिकारी, कर्मचारियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों, श्रमिकों की भारी उपस्थिति में सम्पन्न किया गया।  

इस दौरान कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारी द्वय गजेन्द्र रावत एवं ए.के. तिवारी ने वृक्षारोपण कार्यक्रम का सम्बोधित करते हुए कहा कि जेपीएल सदैव पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदाय के सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध है। यह वृक्षारोपण अभियान आने वाले वर्षों में तमनारांचल को हरितपट्टिका के रूप में आच्छादन प्रदान करने में सहयोगी भूमिका निभायेगी। वहीं वृक्षारोपण कर उपस्थित सभी कर्मचारियों एवं पर्यावरण प्रेमी जन सामान्य को सम्बोधित करते हुए ़मुख्य अतिथि श्री जी. वेंकट रेड्डी, कार्यपालन निदेशक ने कहा कि मियांवाकी पद्धति से पौधरोपण भविष्य की पीढ़ियों के लिए हरित धरोहर तैयार करेगा। यह प्रयास आने वाले समय में वनों की कमी को पूरा करने के लिए ’मील का पत्थर’ साबित होगी।
ज्ञातव्य हो कि मियांवाकी वृक्षारोपण पद्धति एक अनोखी तकनीक है जिससे कम जगह में घने जंगल उगाए जा सकते हैं। इस पद्धति का नाम जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियांवाकी के नाम पर रखा गया है। इस तकनीक के अंतर्गत स्थानीय पौधों की प्रजातियों का चयन कर उन्हें एक ही स्थान पर पास-पास लगाना होता है। बहुत ही कम जगह की आवश्यकता होती है। पौधे 10 गुना तेजी से बढ़ते हैं और 3 साल बाद इनके रख-रखाव की आवश्यकता नहीं होती है। उसके अंतर्गत एक मीटर गहरा गड्ढा खोदकर प्रति स्क्वायर मीटर 3-4 पौधे लगाये जाते हैें। मियांवाकी वृक्षारोपण के लाभ- वायु प्रदूषण नियंत्रण, घने जंगल वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। जैव विविधता मियांवाकी जंगल जैव विविधता को बढ़ावा देते हैं और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करते हैं। यह पद्धति मिट्टी की गुणवत्ता, जंगल मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करते हैं और उसे उपजाऊ बनाते हैं। अंततः यह कहा जा सकता है कि मियावांकी तकनीक न केवल जंगलों को बढ़ावा देती है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
इस अवसर पर सभी अधिकारी एवं कर्मचारियों ने वृक्षारोपण की महत्ता प्रदान करते हुए एक एक पौध रोपण किया तथा एकलय में माना कि पेड़ पौधों को मत करो नष्ट, क्योकिं बाद में सबको सांस लेने में होगा कष्ट। सभी ने स्वीकारा कि वृक्ष हमारे जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी है। हम वृक्ष लगाकर धरती पर पर्यावरण संतुलन को कायम रखने में सफल होते है। वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान आर.पी.मिश्रा, सहायक उपाध्यक्ष, संजीव परासरी, सहायक उपाध्यक्ष, ऋषिकेश शर्मा, सहायक उपाध्यक्ष, आर.पी. पाण्डेय, महाप्रबंधक, सुदीप सिन्हा, महाप्रबंधक, अमित पाण्डेय, पलानी चामी, महाप्रबंधक, सचिन पटनायक, महाप्रबंधक, ले कर्नल (रि) सौरभ भटटाचार्य, प्रमुख, सुरक्षा विभाग,  तारकेश्वर राय के साथ विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्षों, अधिकारी, कर्मचारी एवं आमजनमानस उपस्थित रहे। उक्त अभियान का सफल क्रियान्वयन जी. कृष्णमुर्ति, उप महाप्रबंधक एवं विभागाध्यक्ष के नेतृत्व में श्री मनोज सैनी, शिवेन्द्र करवरिया एवं टीम पर्यावरण प्रबंधन विभाग के सभी कर्मचारियों का योगदान सराहनीय रहा।
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