स्तनपान को बढ़ावा देने और जागरूकता लाने को जिला पंचायत में सीईओ ने दिलाई शपथ

किशोरी, बालिकाओं को आंगनबाड़ियों के माध्यम से किया जा रहा जागरूक

रायगढ़ , / विश्व स्तनपान सप्ताह पूरे जिले में मनाया जा रहा है जिसमें स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार के आयोजन किये जा रहे हैं। माँ के दूध के गुणों के बारे में जानकारी देना और समुदाय में माँ के दूध के महत्व देने के लिए हर वर्ष अगस्त के पहले सप्ताह को विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। इस बार विश्व स्तनपान सप्ताह की थीम “स्तनपान के लिए एक कदम बढ़ाएं और लोगों को इसके लिए शिक्षित और सहयोग करें” रखी गई है।


शुक्रवार को जिला पंचायत में मुख्य कार्यपालन अधिकारी आईएएस अबिनाश मिश्रा ने अधिकारियों-कर्मचारियों और राष्ट्रीय सेवा योजना के छात्रों को स्तनपान को बढ़ावा देने और जागरूकता लाने की शपथ दिलाई। इसी तरह आंबेडकर चौक में भी लोगों को स्वास्थ्य विभाग के द्वारा स्तनपान के प्रति जागरूक किया गया।
स्वास्थ्य विभाग के जिला मोबिलाइजेशन कंसलटेंट शशांक शर्मा ने लोगों से कहा “ स्तनपान को हमें बढ़ावा देना चाहिए। स्तनपान करने वाले बच्चों में मानसिक और शारीरिक वृद्धि उन बच्चों की अपेक्षा अधिक देखी जाती है जिन्हें मां का दूध कम समय के लिए मिलता है। छह माह तक केवल माँ का दूध ही बच्चों की ज़रुरत को पूरा करता है। इस अवधि में बच्चे को कोई और भी चीज़, यानि पानी तक भी नहीं देना चाहिए। छह माह के बाद माँ के दूध के साथ शिशु को पूरक आहार भी देना चाहिए। इसीलिए सरकार शिशुओं को स्तनपान करवाने पर जोर दे रही है।“

जिले के आंगनबाडियों में स्तनपान सप्ताह के साथ वजन त्यौहार भी मनाया जा रहा है। आंगनबाड़ी में किशोरी, बालिकाओं, गर्भवतियों और शिशुवतियों को स्तनपान के महत्व को बताया जा रहा है। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी टिकवेंद्र जाटवर ने कहा, “हम किशोरी और बालिकाओं को खासकर स्तनपान के बारे में जागरूक कर रहे हैं क्योंकि आगे इन्हें ही माता बनना है। हमारी मितानिन और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से इलाके की किशोरी और बालिकाएं काफी घुली-मिली रहती हैं जिसके कारण उन्हें आसानी से हम समझा सकते हैं। शिशुवती और गर्भवती महिलाओं को भी हम स्तनपान के फायदे और नहीं कराने से नुकसान को भी बता रहे हैं। लोगों में जागरूकता आ रही है।“

शुक्रवार को कायाघाट स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में महापौर जानकी काटजू भी पहुंची थी जहां उन्होंने बताया “जिन शिशुओं को जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान नहीं कराया जाता उनमें मृत्यु का जोखिम अधिक होता है। इसलिए जन्म के प्रथम एक घंटे के भीतर ही शिशु को मां का पहला पीला गाढ़ा दूध अवश्य पिलाना चाहिये एवं छः माह तक की आयु तक शिशु को केवल और केवल स्तनपान कराना चाहिए। इस दौरान बच्चे को पानी पिलाने की भी आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि मां के दूध में आवश्यकतानुसार पर्याप्त पानी होता है। “
बच्चों के साथ माताओं को भी कई रोग से बचाता है स्तनपान : सीएमएचओ डॉ. केसरी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केसरी ने बताया, ‘‘मां का दूध शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। यह खुद में संपूर्ण आहार है, 6 माह तक यह शिशु को डायरिया, निमोनिया और कुपोषण से बचाने के लिए आवश्यक है। स्तनपान कराने वाली माताओं में स्तन कैंसर का जोखिम भी कम रहता है । विभिन्न शोधों से यह स्पष्ट हो चुका है कि स्तनपान न केवल शिशुओं को बल्कि माताओं को भी कई रोगों से बचाता है। शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी को दृष्टिगत रखते हुए स्तनपान अत्यंत आवश्यक है। स्तनपान सप्ताह के दौरान आंगनबाड़ी और ग्राम स्तर पर नारे लेखन, वॉल रायटिंग, पोस्टर-बैनर के माध्यम से स्तनपान से संबंधित महत्वपूर्ण संदेशों का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। जनजागरूकता के लिए गृह भेंट कर माताओं को स्तनपान, शिशुओं के उचित पोषण, समुचित देखभाल और स्वास्थ्य संबंधित जानकारी भी दी जा रही है।“
यह हैं छत्तीसगढ़ के स्तनपान से सम्बंधित आंकड़े
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 के अनुसार छत्तीसगढ़ में जन्म से 1 घंटे के अंदर स्तनपान की दर शहरी क्षेत्र में 30.0 प्रतिशत है और ग्रामीण क्षेत्रों में स्तनपान की दर 32.8 है वहीँ प्रदेश में कुल स्तनपान की दर 32.2 प्रतिशत है। इस दर को बढ़ाने के लिए चिकित्सक, स्वास्थ्य कर्मी और समुदाय हर स्तर पर सामूहिक प्रयास किये जा रहे है। इसी क्रम में स्तनपान के व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए स्तनपान सप्ताह भी आयोजित किया जाता है।







