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Wednesday, February 11, 2026

12 प्रमुख समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने का निर्णय ऐतिहासिक-सत्यानंद राठिया

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12 प्रमुख समुदायों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने का निर्णय ऐतिहासिक-सत्यानंद राठिया

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भाजपा प्रदेश महामंत्री ओपी चौधरी की उपस्थिति में जनजाति वर्ग के भाजपा नेताओं ने प्रेस वार्ता कर प्रधानमंत्री को दिया साधुवाद

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छत्तीसगढ़ के 10 लाख आदिवासी परिवारों की तरफ से केंद्र सरकार को धन्यवाद 

रायगढ़- भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सत्यानंद राठिया ने 12 जनजाति समुदायों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल कर उन्हें उनके संवैधानिक अधिकार व लाभ प्रदान करने के लिए कानून बनाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि आजादी के बाद से महज़ लिपिकीय त्रुटि के कारण पिछले 70 वर्ष से अपने संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण के लाभ से वंचित 12 जनजाति समुदायों के लोग अब अपना स्वर्णिम भविष्य गढ़ पाएंगे। श्री राठिया जी ने कहा कि भारत के, विशेषकर आदिवासी प्रदेश छत्तीसगढ़ के इतिहास में कल 25 जुलाई का दिन मील के पत्थर के रूप में याद किया जाएगा, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने देश के 12 प्रमुख समुदायों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल कर लिया। कल राज्यसभा से भी यह विधेयक पारित होने के बाद अब क़ानून बन गया है। इससे इस महत्वपूर्ण निर्णय के लिए प्रदश भाजपा देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, केन्द्रीय जनजाति कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा व केन्द्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह का बार-बार अभिनंदन करती है।

इन जातियों को मिलेगा लाभ

भाजपा प्रदेश महामंत्री श्री ओपी चौधरी ने सूची में शामिल जातियों का विवरण दिया। भारिया भूमिया के समानार्थी भूईया, भूईयाँ, भूयां, धनवार के समानार्थी धनुहार धनुवार, नगेसिया, नागासिया के समानार्थी किसान, सावर, सवरा के समानार्थी सौंरा, संवरा, धांगड़ के साथ प्रतिस्थापित करते हुए सुधार, बिंझिया, कोडाकू के साथ साथ कोड़ाकू, कोंध के साथ-साथ कोंद, भरिया, भारिया, पंडो, पण्डो, पन्डो को जनजाति वर्ग में शामिल किया गया है। 

संसद में चर्चा

श्री ओपी चौधरी ने कहा कि कल इस संबंध में संसद में प्रस्तुत विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेकर विभागीय मंत्री श्रीमती रेणुका सिंह ने सही कहा कि आज का यह दिन न केवल छत्तीसगढ़ में निवासरत आदिवासी समुदायों के लिए, अपितु देशभर में निवासरत 700 (सात सौ) जनजाति समुदायों के लिए ऐतिहासिक है। जिन 12 जातियों को सूची में लाने के लिए यह संशोधन प्रस्ताव लाया गया है, उनमें से 10 जातियाँ लिपिकीय त्रुटियों के कारण संविधान प्रदत्त अधिकारों और लाभ से आजादी के इतने वर्षों बाद भी वंचित थीं। यहां विशेष तौर विशेष तौर पर उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति का दत्तक पुत्र कही जाने वाली विशेष पिछड़ी पण्डो जनजाति भी आजादी के 75 वर्ष बाद भी अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल नहीं किए गए थे।

कांग्रेस सांसदों का इस महत्पूर्ण विधेयक की चर्चा में भाग न लेना दुर्भग्यजनक

भाजपा प्रदेश महामंत्री ओपी चौधरी ने कहा की छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य राज्य है जहाँ आदिवासियों को त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों में भाग लेने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन सूची से बाहर जनजाति समुदायों के लोग किसी भी तरह चुनाव में भाग नहीं ले पाते थे। अब जा कर सभी अनुसूचित जनजाति समुदायों को उनका अधिकार मिला है। इस विषय का सबसे दुर्भाग्यजनक पहलू यह है कि सदन में जब इस महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा हो रही थी तब वहां छत्तीसगढ़ कोटा से आने वाले सभी कांग्रेसी सदस्य अनुपस्थित थे। भले वोट की राजनीति के मजबूरीवश कांग्रेस सड़क पर कुछ भी कहती रहे, लेकिन जब भी ऐसे कोई विषय परिणाम तक पहुँचने वाले होते हैं, तब कांग्रेस अड़ंगा लगाती ही है। आखिर 50 से अधिक वर्षों तक इसी कांग्रेस ने इन तमाम मामलों को लटकाए भी रखा था। 

 ऐसे मामले में जान-बूझ कर कांग्रेस के अनुपस्थित होने या वंचित वर्ग के कल्याण से संबंधित का यह कोई पहला मामला भी नहीं है। पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का भी विरोध कर राज्यसभा में कांग्रेस ने उसे तब पारित नहीं होने दिया था। इसी तरह आदिवासी और पिछड़े वर्ग को दिए जाने वाले आरक्षण के विरुद्ध प्रदेश की कांग्रेस सरकार कोर्ट में अपने लोगों से मुक़दमा करा कर, अपने महाधिवक्ता को कोर्ट में सुनवाई के दिन अनुपस्थित करा कर जान बूझ कर हार जाना और फिर मुक़दमा करने वालों को पद देकर पुरस्कृत करना आदि निंदनीय हथकंडे हमेशा कांग्रेस अपनाती रही है। कांग्रेस को वंचित तबकों के साथ ऐसे खिलवाड़ से बाज आना चाहिए। इन तमाम हथकंडों से पार पाते हुए आदिवासी समाज ने आज एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इन जाति समुदायों के छत्तीसगढ़ की अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल होने के बाद इन्हें शासन की अनुसूचित जनजातियों के लिये संचालित योजनाओं का लाभ मिलने लगेगा। छात्रवृत्ति, रियायती ऋण, अनुसूचित जनजातियों के बालक-बालिकाओं के छात्रावास की सुविधा के साथ शासकीय सेवा और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिल सकेगा।

कई वर्षों की पीड़ा से आदिवासी समाज को मुक्ति मिली : 

 आजादी के बाद से जिस पीड़ा को 12 अनुसूचित जनजातियां झेल रही थी उससे उन्हें अब मुक्ति मिली है। महज मात्रात्मक त्रुटि की वजह से इन 12 जनजातियों की पीढ़ियों को अपने अधिकारों और संविधान प्रदत्त लाभ से वंचित रहना पड़ा। इन समुदायों के लाखों लोग अब शिक्षा, स्वास्थ्य और संविधानिक अधिकार व आरक्षण का लाभ मिलेगा। यह काम एक दो दिनों के लिए नहीं हुआ है बल्कि इन जनजातियों की पीढ़ियों को इसका स्थायी रूप से लाभ मिलेगा। इसके लिए प्रदेश और प्रदेश की इन जनजातियों समुदायों की ओर से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय जनजाति कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा व केन्द्रीय राज्य मंत्री रेणुका सिंह का आभार माना। इन जनजातीय समुदायों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी के साथ हुई पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह की चर्चा तथा पत्र व्यवहार का जिक्र करते हुए कहा कि भारत सरकार से संविधान में आवश्यक संशोधन कर अनुसूचित जनजाति समुदायों सूची में शामिल करने के लिए प्रधानमंत्री ने तत्काल पहल की और आदेश किया। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस विषय को आगे बढ़ाते हुए इस विधेयक को पहले लोकसभा में और फिर राज्यसभा में पारित करवाया और उसे कानून का जामा पहनाया। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र व विशेष पिछड़ी जाति पंडो जनजाति को अनुसूचित जनजाति का पीढ़ियों से अधिकार व लाभ नहीं मिलना सबसे बड़ी विसंगति थी। यह विसंगति अब दूर हो गई है। 

आज की प्रेस वार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष उमेश अग्रवाल,भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य गुरुपाल सिंह भल्ला,पूर्व विधायक विजय अग्रवाल,जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह,जिला भाजपा उपाध्यक्ष अरुण राय,जिला पंचायत सद्स्य रोहणी बसंत राठिया,जिला पंचायत सदस्य सहौद्रा दुर्गेश राठिया,जनपद सदस्य जागेश सिंह,पूर्व जनपद अध्यक्ष अमलसाय राठिया,भाजपा जिला संवाद प्रमुख मनीष शर्मा,रायगढ़ विधानसभा मीडिया सहप्रभारी ओंकार तिवारी उपस्थित रहे।

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