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Monday, February 2, 2026

अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से गत वित्तीय वर्ष में टमाटर और खीरे की हुई रिकॉर्ड पैदावार..सामूहिक खेती से स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने पेश की मिसाल

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  • अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से गत वित्तीय वर्ष में टमाटर और खीरे की हुई रिकॉर्ड पैदावार
  • वित्तीय वर्ष 2022 -23 में रुपये 6 लाख से ज्यादा की हुई आमदनी

रायगढ़; / “कोशिश करने वालों की हार नहीं होती, लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती।” कविता की इन लाइनों को साबित कर दिखाया जिले के पुसौर विकासखण्ड में स्थित रायगढ एनर्जी जनरेशन लिमिटेड (आरईजीएल) के आसपास के ग्रामों की 19 स्वसहायता समूह की महिलाओं ने। जिन्होंने लगभग चार एकड़ जमीन में सब्जियों के सामूहिक खेती कर इसके अच्छे पैदावार से न सिर्फ स्वयं अपितु क्षेत्र को भी आत्मनिर्भर बनाया है। आरईजीएल के आजीविका उन्नयन के कार्यक्रमों के तहत अदाणी फाउंडेशन द्वारा क्षेत्र के तीन ग्राम सूपा, बरपाली और जेवरडीह की क्रमशः आठ, छः और पांच स्वसहायता समूहों सहित कुल 33 महिला सदस्यों को खेती के कार्यों में रूचि को देखते हुए कृषि कौशल में पारंगत करने का बीड़ा उठाया है।

  • कृषि कौशल का प्रशिक्षण देकर कृषि उपकरणों से भी की सहायता

अदाणी फाउंडेशन द्वारा उपरोक्त तीनों गांव की कुल 19 समूहों की इन महिला सदस्यों को खेती के गुणों को सिखाने चार दिनों का प्रशिक्षण कार्यक्रम रखा गया जिसमें कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा बून्द सिंचाई (ड्रिप पद्धति) सहित जैविक और रासायनिक खेती के साथ साथ सामूहिक खेती तथा इससे होने वाले लाभ और विपणन सम्बन्धी जानकारी विस्तार से प्रदान की गयी। इसके उपरांत उन सभी समूहों को सामूहिक खेती प्रारंभ करने हेतु आवश्यक ड्रिप पद्धति संबंधी उपकरण, खाद, फर्टिलाइजर, कीटनाशक दवाओं और उन्नत किस्म के पौधों और बीजों का सहयोग के साथ ही ड्रिप पद्धति से कृषि करने योग्य भूमि की तैयारिया इत्यादि प्रदान की गयी। समूह के सभी सदस्यों को आधुनिक पद्धति से व्यवसायिक खेती को समझाने और करीब से अनुभव हेतु अन्य बड़े किसानों के खेतों का शैक्षणिक भ्रमण भी कराया गया।

  • जमीन की उर्वरा शक्ति की जांच कराकर की, टमाटर और खीरे की खेती

अदाणी फाउंडेशन के द्वारा स्व सहायता समूहों की महिलाओं को सामूहिक खेती के फायदों से अवगत कराते हुए उचित प्रशिक्षण प्रदान कर सामूहिक खेती हेतु प्रेरित किया। वहीं अच्छी पैदावार के उद्देश्य से जमीन की उर्वराशक्ति की जांच कराकर सब्जियों का चयन कराया। जिसमें मुख्य तौर पर टमाटर एवं खीरे की खेती की शुरूआत करवाई गयी। इसके अतिरिक्त कृषि के वरिष्ठ जानकारों और वैज्ञानिकों से भी निरंतर तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन के लिए राय भी ली जा रही है। जिससे सब्जी की बेहतर पैदावार हो और समूह अधिक लाभ अर्जित कर सशक्त बन सके। इसका परिणाम भी जल्द ही सामने आने लगा।

  • सब्जियों की हुई रिकार्ड पैदावार, रुपये 6 लाख से ज्यादा की हुई कमाई

सामूहिक खेती की इस पहल से मार्च 2023 तक ग्राम सूपा और बरपाली की महिला स्व सहायता समूहों ने टमाटर और ग्राम जेवरीडीह के समूहों द्वारा खीरे का उत्पादन कर कुल 6,10,560 रूपए (छ: लाख दस हजार पाँच सौ साठ) की आय अर्जित की है। इससे वे अपने परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग करने के साथ ही बच्चों के शिक्षा इत्यादि में खर्च कर पाने मे सक्षम बन रही है। समूह की इन महिलाओं ने साबित कर दिखाया कि संगठन मे बड़ी ताकत है,और अगर किसी कार्य के प्रति मन मे दृढ संकल्प और जुनून हो तो कठिन से कठिन लक्ष्य को भी प्राप्त किया जा सकता है।

  • इस सफलता के लिए क्या कहती हैं समूह की महिलाऐं

ग्राम सूपा कि सरपंच और नारी शक्ति समूह की अध्यक्ष श्रीमती चंद्रिका बाई रात्रे और शारदा समूह की अध्यक्ष श्रीमती सुशीला साव ने ड्रिप पद्धति और सामूहिक खेती के अपने निजी अनुभवों को बताते हुए कहा कि,”पहले हम सभी समूह की महिलायें सामूहिक रूप से ही परंपरागत तरीके से गोंठान की जमीन का छोटे-छोटे टुकड़ों मे बटवारा कर आलू और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती कर रही थी, परंतु इससे केवल घर के खाने जितनी ही सब्जियों का उत्पादन हो पा रहा था। वहीं अगर सब्जियां विक्रय कर भी रही थी तो उससे फसल की लागत भी नहीं निकल रही थी। अदाणी फाउंडेशन के सहयोग से हमने प्रशिक्षण लेकर कृषि की आधुनिक ड्रिप पद्धति के माध्यम से सामूहिक सब्जी उत्पादन का कार्य करना प्रारंभ किया है। तब से ग्राम बरपाली और सूपा के कुल 2.80 एकड़ की जमीन पर करीब 73.64 क्विंटल टमाटर की पहली फसल के विक्रय से 5.50 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर चुकी हैं। और आर्थिक रूप से अपने परिवारो को सहयोग कर पा रही है।”

“पहले हमारे गाँव कि महिलायें खुद के घर या बाड़ी में ही घर मे खाने योग्य ही सब्जी का उत्पादन कर रही थी एवं इससे उन्हें किसी भी प्रकार का आर्थिक लाभ नहीं हो पा रहा था। फिर अदाणी फाउंडेशन के मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से आज हम 5 समूह की 8 सदस्य मिलकर सामूहिक रूप से ड्रिप पद्धति के माध्यम से कुल 0.70 एकड़ जमीन में खीरा का उत्पादन कर रहीं हैं। अभी तक कुल 55.56 क्विंटल के उत्पादन एवं विक्रय के बाद कुल 55.56 हजार रुपये कि आय अर्जित कर चुकी है, जिससे इनके पूरे परिजनों मे खुशी व्याप्त है। वहीं समाज मे भी हमारी पूछ परख पहले कि तुलना मे बढ़ी है। इससे समूह की हम सभी महिलाये बहुत गर्व का अनुभव कर रहीं हैं,और अदाणी फाउंडेशन के प्रति अपना आभार व्यक्त करते है।” ग्राम जेवरीडीह से एकता समूह की सचिव डोल कुमारी ने कहा।

  • प्रशासन ने की सराहना

पुसौर विकासखंड की बिहान परियोजना प्रबंधक श्रीमती छाया ईश्वर ने कहा कि, “समूह की महिलाएँ सामूहिक खेती से कम जोखिम उठाकर अधिक लाभ अर्जित कर रही है,अदाणी फाउंडेशन द्वारा आजीविका विकास कार्यक्रम के तहत ग्राम की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके सशक्तिकरण हेतु ड्रिप पद्धति द्वारा व्यावसायिक सब्जी उत्पादन के कार्य को एक सराहनीय प्रयास है। जिससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा और निकट भविष्य मे व्यवसायिक कृषि के क्षेत्र मे अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा पाएंगे एवं इस कार्य हेतु अदाणी फाउंडेशन के प्रति कृतज्ञता प्रकट की।”

आरईजीएल सदैव ही महिला सशक्तिकरण के प्रति कृतसंकल्पित है,और भविष्य में भी क्षेत्र के सम्पूर्ण विकास में सहभागी बनेंगे। समूह की महिलायें इस आधुनिक तकनीक का लाभ लेकर टमाटर और खीरे का उत्पादन कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। जिससे उनकी पारिवारिक, आर्थिक और सामाजिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है। सब्जी उत्पादन के कार्य को सफल और सुचारु रूप से संचालन में स्व सहायता समूह की महिलाओ के साथ ही अदाणी फाउंडेशन से श्री विवेक पाण्डेय, श्री निलेश कुमार महाणा, श्री परमेश्वर गुप्ता, श्रीमती सोमप्रभा गोस्वामी का विशेष सहयोग रहा।

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