रायगढ़ । ज्यादातर किसान धान की फसल के बाद खेत में छूट गए पराली को जला देते हैं, इससे जमीन को नुकसान होता है, जमीन की उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है। जिंदल फाउंडेशन द्वारा क्षेत्र के लोगों को पराली जलाने से रोकने के लिए प्रयास किया जा रहा है। क्षेत्र के 78 गांवों में विशेष रूप से स्व सहायता समूह की महिलाओं को इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। े बिहान समूह से जुड़ी महिलाओं को जन जीविका केंद्र में पराली प्रबंधन के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षण दिया गया। महिलाओं को पराली जलाने के नुकसान व उसे इकट्ठा कर किसान समूह को देने के फायदे बताए गए।

जिंदल पावर के जिंदल फाउंडेशन द्वारा प्लांट के पास से जन जीविका केंद्र का संचालन किया जा रहा है। पराली के उपयोग और उससे आर्थिक लाभ महिलाओं को कैसे मिले यह बताने के लिए बिहान समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण करने के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। केंद्र के प्रभारी संतोष डनसेना ने बिहान समूह की महिलाओं को पराली को जलाने के बजाय उसे इकट्ठा कर उससे आर्थिक लाभ कैसे प्राप्त किया जा सकता है इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि धान बेचने से तो किसानों को फायदा होता है, लेकिन पराली इकट्ठा कर महिलाएं भी पैसा कमा सकतीं हैं क्योंकि जितना पराली वो इकट्ठा करके किसान उत्पादक समूह को बेचेंगी उसका पैसा सीधा समूह की महिलाओं के खाते में जाएगा। उन्होंने बताया कि पराली इकट्ठा करने के लिए जरूरी मशीनें जिंदल फाउंडेशन के पास से उसका उपयोग महिलाएं कर सकतीं हैं।
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को भी दी गई जानकारी
शुक्रवार को क्षे़त्र में पदस्थ ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को भी पराली नहीं जलाने और उसके उपयोग के संबंध में जानकारी देने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उन्हें बताया गया कि वे किसानों को पराली न जलाने के लिए प्रेरित करें। सीएसआर की मैनेजर शीतल पटेल ने बताया कि जो भी किसान अपने खेत से पराली देना चाहेगा वह केवल सूचना दे दे उसके खेत से पराली काटने व इकट्ठा करने का काम कंपनी द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पराली को खेत में नहीं जलाने से खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी साथ ही आर्थिक लाभ भी उन्हें मिलेगा। इस अवसर पर एसडीओ एग्रीकल्चर उदित नारायण नगोई, बीज निगम चपले से रोशन टोप्पो ने भी आरईओ लोगों से किसानों को प्रेरित करने का आग्रह किया।
ये काम करना होगा महिलाओं को, इसके फायदे भी
महिलाओं को खेल से पराली उठाने के लिए स्कवेयर बैलर मशीन का उपयोग करना होगा। इस मशीन से खेतों की पराली काट कर उठा सकती हैं। इससे समय की बचत होगी और मैन पावर का भी अधिक उपयोग नहीं होगा, जिससे खर्च कम आएगा। इकट्ठा किए हुए पराली को वे सीधा किसान उत्पादक समूह को बचे सकेंगी।
स्ट्रा रिपर मशीन का उपयोग भी किया जा सकता है। यह मशीन पैरा को छोटे छोटे टुकड़ों में काटता है। टुकड़ों में कटे हुए पैरे को भी वे किसान उत्पादक समूह को बेचकर आर्थिक लाभ ले सकतीं हैं। इसके अलावा वे अपने घरों के मवेशियों के लिए कटिया का भी उपयोग कर सकते हैं।
इसके अलावा महिलाएं राउंड बेलर मशीन का उपयोग करके भी पराली उठा सकतीं हैं। इस मशीन से उठाए गए पैरा का उपयोग वे खुद कर सकेंगी।
महिलाओं को बायो डी कंपोजर खाद जिंदल फाउंडेशन द्वारा फ्री में दिया जाएगा। इसे स्प्रे करने के लिए भी मशीन भी उपलब्ध कराई जाएगी। जिससे डिकंपोजर खाद बना सकेंगी।
पराली जलाने से मिट्टी और खेत को नुकसान
पराली में आग लगा देने से मिट्टी की ऊपरी सतह पर मौजूद जरूरी पोषक तत्व जैसे नाइट्रोजन, पोटास, फास्फोरस, सल्फर और कार्बन जलकर नष्ट हो जाता है।
मिट्टी में मौजूद केचुए और मिट्टी को उपजाऊ बनाने वाले मित्र जीवाणु आग की गर्मी से मर जाते हैं।
लगातार पराली जलाने से मिट्टी की संरचना खराब होती है, नमी सूख जाती है और धीरे धीरे जमीन बंजर होने लगती है।









