केन्द्रीय रेशम बोर्ड के मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 के तहत टसर कोसा केन्द्र कटकलिया में रेशम स्व सहायता समूह, धागाकरण समूह की बैठक आयोजित किया गया। बैठक में केन्द्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक डॉ. वाय.एस. श्रीनाथ सहित रेशम विभाग के उप संचालक मनीष पवार एवं जिला के फील्ड आफीसर रेशम आई.आर. भगत, वरिष्ठ रेशम निरीक्षक आर. के. करियाम, कनिष्ठ रेशम निरीक्षक चन्द्रिका प्रसाद श्रीवास एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के संचालन में वैज्ञानिक डॉ. वाय.एस. श्रीनाथ ने” मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0″ के मुख्य उद्देश्य से अवगत कराया। रेशम के विभिन्न गतिविधियों के तहत रेशम कीट प्रबंधन, तकनीक एवं गुणवत्तायुक्त बीज उत्पादन, निःसंक्रमण तकनीक का जागरुकता कार्यक्रम चलाया गया।
रेशम उत्पादन में वृद्धि हेतु अप्रभावी क्षेत्रों को प्रभावी पौधरोपण कर प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने, खाद्य पौधों के बेहतर रखरखाव एवं समूह के द्वारा सामूहित कृमिपालन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। साथ ही हितग्राहियों को टसर कृमिपालन के साथ-साथ टसर रेशम धागाकरण कार्य का प्रशिक्षण दिया जाना होगा जिससे रिलेबल ककून सीधे समूहों को धागाकरण हेतु उपलब्ध रहेगा। समूह के द्वारा उत्पादित धागे की ब्रॉडिंग, पैकेजिंग पर भी ध्यान देना होगा, जिससे रायगढ़ जिले सिल्क को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।” मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0″ का मूल उद्देश्य हितग्राही के आय को बढ़ाना है। इस हेतु अन्तर-फसल के समय रोपण तकनीक और होने वाली आय विस्तृत जानकारी अभियान के माध्यम से दी गई। इससे जिले के टसर हितग्राहियों को वर्ष भर रोजगार मिलेगा और पलायन कम होगा। निश्चित ही केन्द्रीय रेशम बोर्ड का” मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0″ मील का पत्थर साबित होगा।









