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Wednesday, July 15, 2026

मेसर्स वेदांता वाशरी की जनसुनवाई 23 फरवरी को… आदिवासियों की जमीन में घोटाला…जनसुनवाई के नाम पर खानापूर्ति…

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रायगढ़। 23 फरवरी को होने वाले जनसुनवाई में ग्रामीणों ने विरोध जताया है एक बार फिर जनसुनवाई के नाम पर खाना पूर्ति होने जा रही है और शहर में धुएं के रूप में आसमान में जहरीली गैसों को छोड़ा जा रहा है जिससे लोगों का जीना मुहाल हो जाएगा। इन उद्योगों के लगने और विस्तारीकरण से मौत की ओर बढ़ता लोगों का जीवन। जिले के इतिहास में कुनकुनी आदिवासी जमीन घोटाला एक ऐसा काला अध्याय है। जिसमें आदिवासियों को ठगी का शिकार बनाकर अवैध तरीके से जमीन छीन ली गई और उस पर वेदांता जैसी कंपनी को दे दी गई। इस कंपनी ने पहले आदिवासियों की जमीन छीन कर उन्हें घर से बेदखल कर दिया अब यही कंपनी अपना प्लांट लगा कर लोगों की सांस छिनने की तैयारी में है। मेसर्स वेदांता वाशरी एंड लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की यह कंपनी कुनकुनी में अपना वृहद प्लांट डालने जा रही है, जिसकी जनसुनवाई जिला प्रशासन ने 23 फरवरी मुकर्रर की है। आलम यह है कि कुनकुनी में प्रदूषण के कारण वर्तमान में लोगों का जीना मुहाल है ऐसे में इस प्रदूषण वाले क्षेत्र में वेदांता का प्लांट लगाने के लिए जिला प्रशासन लगा हुआ है। जिस तरह कुनकुनी जमीन घोटाला अधिकारियों के संरक्षण में हुआ कुछ इसी तरह इस बार भी जिला प्रशासन के अधिकारी संदेश के दायरे में हैं। वेदांता का प्लांट कुनकुनी के लोग नहीं चाहते लेकिन प्रशासन प्रदूषण के सारे मापदंडों को दरकिनार कर इस प्लांट को विस्तार देने में अपनी मुहर लग चुका है,
जनसुनवाई तो महज औपचारिकता भर है। ऐसे में प्रदूषण के कारण गंभीर बीमारियों और समस्याओं से जूझ रहे लोग प्लांट लगने से किस तरह जी पाएंगे यह एक सवाल है।
खरसिया में कोई भी भूमि अधिग्रहण बिना ग्राम सभा की अनुमति नहीं की जा सकती है। क्योंकि यह आदिवासी विकासखंड होने से पेसा एक्ट के दायरे में आता है। संबंधित कंपनी को ग्राम सभा से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। इसके बाद ही वहां पर जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है ।

लेकिन वेदांता के लिए सभी नियम कायदे ताक पर रख दिये गए। प्लांट लगाने के लिए कोई ग्रामसभा नहीं हुई।सब अधिकारियों और उद्योगपति की साठगांठ से हो गया।

जिले के इतिहास में कुनकुनी आदिवासी जमीन घोटाला एक ऐसा काला अध्याय है। जिसमें आदिवासियों को ठगी का शिकार बनाकर अवैध तरीके से जमीन छीन ली गई और उस पर वेदांता जैसी कंपनी को दे दी गई। इस कंपनी ने पहले आदिवासियों की जमीन छीन कर उन्हें घर से बेदखल कर दिया अब यही कंपनी अपना प्लांट लगा कर लोगों की सांस छिनने की तैयारी में है। मेसर्स वेदांता वाशरी एंड लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड नाम की यह कंपनी कुनकुनी में अपना वृहद प्लांट डालने जा रही है, जिसकी जनसुनवाई जिला प्रशासन ने 23 फरवरी मुकर्रर की है। आलम यह है कि कुनकुनी में प्रदूषण के कारण वर्तमान में लोगों का जीना मुहाल है ऐसे में इस प्रदूषण वाले क्षेत्र में वेदांता का प्लांट लगाने के लिए जिला प्रशासन लगा हुआ है। जिस तरह कुनकुनी जमीन घोटाला अधिकारियों के संरक्षण में हुआ कुछ इसी तरह इस बार भी जिला प्रशासन के अधिकारी संदेश के दायरे में हैं। वेदांता का प्लांट कुनकुनी के लोग नहीं चाहते लेकिन प्रशासन प्रदूषण के सारे मापदंडों को दरकिनार कर इस प्लांट को विस्तार देने में अपनी मुहर लग चुका है,
जनसुनवाई तो महज औपचारिकता भर है। ऐसे में प्रदूषण के कारण गंभीर बीमारियों और समस्याओं से जूझ रहे लोग प्लांट लगने से किस तरह जी पाएंगे यह एक सवाल है।
खरसिया में कोई भी भूमि अधिग्रहण बिना ग्राम सभा की अनुमति नहीं की जा सकती है। क्योंकि यह आदिवासी विकासखंड होने से पेसा एक्ट के दायरे में आता है। संबंधित कंपनी को ग्राम सभा से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। इसके बाद ही वहां पर जमीन का अधिग्रहण किया जा सकता है ।

लेकिन वेदांता के लिए सभी नियम कायदे ताक पर रख दिये गए। प्लांट लगाने के लिए कोई ग्रामसभा नहीं हुई।सब अधिकारियों और उद्योगपति की साठगांठ से हो गया।

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