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Thursday, March 19, 2026

कलेक्टर की नौकरी छोड़ मंत्री बने ओपी चौधरी ने कहा – अच्छे लोग राजनीति में नहीं आते इसलिए बुरे लोग राज करते है…

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ओपी चौधरी का इंटरव्यू…

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ओपी चौधरी छत्‍तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बाद ओपी चौधरी दूसरे IAS अफसर हैं जो कि कम उम्र में नौकरी छाेड़कर छत्तीसगढ़ की सियासत में कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई है।

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अजीत जोगी के बाद ओपी चौधरी दूसरे IAS अफसर जिन्‍होंने छत्तीसगढ़ की सियासत में बनाई पहचान

महज 36 साल की उम्र में ओपी चौधरी भारतीय प्रशासनिक सेवा की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए

रायगढ़ के विधायक ओपी चौधरी अब छत्‍तीसगढ़ की विष्‍णुदेव साय सरकार में बने मंत्री

महज 36 साल की उम्र में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए रायगढ़ के विधायक ओपी चौधरी अब मंत्री बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब वह प्रशासनिक बंधनों से मुक्ति का एहसास कर रहे हैं। मंत्री बनने के बाद वह छत्तीसगढ़ की जनता के लिए वे ऐसा काम कर पाएंगे जो अफसर रहते हुए नहीं कर पाए।

“चौधरी ने कहा कि वे चाणक्य के उस कथन से प्रभावित होकर राजनीति में आए हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि अच्छे लोगों के राजनीति में भाग नहीं लेने का पहला दुष्परिणाम यह होता है कि बुरे लोग अच्छे लोगों पर शासन करते हैं। इसलिए मैंने 13 साल के प्रशासनिक जीवन को छोड़ते हुए इस बड़ी चुनौती को स्वीकार किया और राजनीति में आया। उन्होंने कहा कि यह सच है कि आज राजनीति में अच्छे लोगों को आने की जरूरत है। हर कोई डाक्टर, इंजीनियर, वकील, आइएएस बनना चाहता है मगर लोकतंत्र की राजनीतिक व्यवस्था राजनीति में अच्छे लोगों की जरूरत है।”

उल्लेखनीय है कि चौधरी प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बाद दूसरे आइएएस अफसर हैं जो कि कम उम्र में नौकरी छाेड़कर छत्तीसगढ़ की सियासत में अपनी पहचान बनाई है। जोगी भी आइएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए थे। अब चौधरी भी प्रशासनिक अनुभवों के बाद राजनीतिक दुनिया में बड़ा मुकाम हासिल करने की ओर अग्रसर हैं। 2005 बैच के अधिकारी चौधरी केवल 22 साल में आइएएस बने। 2018 में जब ओपी ने नौकरी छोड़ी, तब वह डा.रमन सिंह की सरकार में रायपुर में कलेक्टर थे। भाजपा में प्रवेश कर वह साल 2018 में खरसिया विधानसभा सीट से चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। अभी रायगढ़ से चुनाव जीते हैं।

छत्तीसगढ़ के नवनियुक्त राज्य शासन के मंत्री ओपी चौधरी ने मिडिया से की गई चर्चा के प्रमुख अंश

सवाल:- आप युवाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत माने जा हैं, आपकी उनके प्रति क्या सोच है?

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार में जिस तरह से युवाओं के साथ छल हुआ। भर्तियों में जिस तरह अन्याय हुआ और घोटाला हुआ, उससे हम युवाओं को मुक्ति दिलाना चाहते हैं। प्रदेश की भर्तियों को पारदर्शी बनाने की मेरी सोच है। युवाओं को यही कहना चाहूंगा कि वह सकारात्मक रहें और मेहनत करें। उनके लिए यह सरकार मार्ग प्रशस्त करेगी। हमारी सरकार युवाओं के लिए समर्पित होकर काम करेगी।

सवाल: छत्तीसगढ़ में अब आप मंत्री होंगे, पहली प्राथमिकता क्या होगी ?

मोदी की गारंटी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। हम मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार में उनके दिशा-निर्देश के साथ प्रदेश में चल रहे माफिया राज को खत्म करेंगे। हालांकि पिछली कांग्रेस सरकार ने छत्तीसगढ़ के आर्थिक ढांचे को खोखला कर दिया है। अब बेहतर वित्तीय प्रबंधन के साथ छत्तीसगढ़ को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाएंगे।

सवाल: रायपुर के कलेक्टर रहते हुए आपने आइएएस की नौकरी छोड़ी, क्या वजह थी?

मैं शुरू से ही छत्तीसगढ़ की सेवा करना चाहता था, अफसर रहते हुए बहुत सारी पांबदियां थी, इस बीच हमने चाणक्य का एक कथन पढ़ा, जिसका असर मेरे दिमाग में पड़ा। चाणक्य ने कहा था कि अच्छे लोगों के राजनीति में भाग नहीं लेने से पहला दुष्परिणाम यह होता है कि बुरे लोग अच्छे लोगों पर शासन करते हैं। मुझे लगता है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक व्यवस्था ठीक रहे तो बाकी सभी शैक्षणिक आर्थिक, सामाजिक व्यवस्था स्वत: ही सुधर जाएगी।

सवाल: आपके पास प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों अनुभव है, क्या अंतर पाते हैं ?

 मैंने 13 साल तक बतौर आइएएस की नौकरी में लोगों की सेवा की। प्रशासन में जो भी काम किया वह तत्कालीन सरकार के दिशा-निर्देश में किया। लोकतंत्र में पालिटिक्स महत्वपूर्ण है और यहां चुनौतियां बहुत है। पथरीले और टेढ़े मेढ़े रास्ते हैं फिर भी लोकतंत्र में राजनीतिक व्यवस्था में आने से ही ज्यादातर काम सफल होते हैं क्योंकि यहां हम प्रशासनिक अफसर की अपेक्षाकृत बंधनमुक्त हो जाते हैं। मैंने भी राजनीति में आने की चुनौती को स्वीकार किया है क्योंकि सभी व्यवस्था को राजनैतिक व्यवस्था प्रभावित करती है।

सवाल: आप 2005 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के अफसर हैं, अब मंत्री बने हैं। वरिष्ठ आइएएस अफसरों को निर्देश देने में हिचक भी हो सकती है कैसे करेंगे ?

सबकुछ आपकी जिम्मेदारी पर निर्भर करता है। जब मैं आइएएस था तो मैंने अपने वरिष्ठों का सम्मान किया। उनके निर्देशों का पालन किया। आज मंत्री के पद पर आया हूं तो मुख्यमंत्री साय समेत अन्य नेताओं के के साथ मेरी भी अलग जिम्मेदारी है। अब कैबिनेट मंत्री के रूप में मेरी जिम्मेदारी रहेगी।

सवाल: प्रशासन में रहकर भी जनता के लिए काम क्यों नहीं कर सकते हैं?

प्रशासन में काम करने का दायरा छोटा होता है। जो सोच सत्तादल की होती है उसका क्रियान्वयन करने का काम होता है। उसी के हिसाब से प्रदेश की दिशा-दशा तय होगी। पालिसी निर्धारण में कहीं न कहीं हस्तक्षेप होता है और अब जब हम स्वयं मंत्रिमंडल में हैं तो बंधनमुक्त होकर काम करेंगे। अब प्रशासनिक बंधनों से आजाद होकर काम कर सकेंगे।

सवाल: आपका सफर बहुत संघर्षमय था और कलेक्टर बनने को कैसे प्रेरित हुए, अब कैसा महसूस कर रहे हैं ?

मैं जब महज साढे़ सात साल का था पिता का निधन हो गया। मां कौशल्या जो कि चौथी पास थीं, उन्होंने मुझे बचपन से ही प्रेरित किया। पाला-पोशा और बड़ा हुआ। मां के कारण ही मेरे व्यक्तित्व का विकास हुआ। एक बार कलेक्ट्रेट में गया और कलेक्टर के कामों से प्रभावित होकर मैंने भी अफसर बनने की कोशिश की और सफल हुआ। जीवन के हर हिस्से पर इंज्वाय किया। अच्छे से पढ़ा फिर संघर्षों के साथ दिल्ली में आइएएस की तैयारी की। इसके बाद 13 साल तक आइएएस रहा। ईश्वर का शुक्रगुजार हूं कि मुझे छत्तीसगढ़ में काम करने का मौका मिला। अब राजनीति में आकर काम कर रहा हूं। मंत्री पद को दायित्व बोध से देखता हूं।

मंत्री बने ओपी चौधरी…

दो जून 1981 को मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे ओपी के पिता दीनानाथ चौधरी एक शिक्षक थे। जब ओपी दूसरी कक्षा में पढ़ रहे थे, तब उनके पिता का देहांत हो गया था। उनकी मां कौशल्या चौधरी चौथी पास थीं फिर भी उन्होंने ओपी की पढ़ाई के लिए उन्हें प्रेरित किया। चौधरी अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा अपने पैतृक गांव बायंग से ही पूरी की। खपरैल के स्कूल में उन्होंने पढ़ाई की।

इसके बाद हायर सेकेंडरी की शिक्षा में पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से ओपी चौधरी ने स्वय ही अपनी पढ़ाई पूरी की। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने भिलाई से बीएससी की। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से गणित, भौतिकी और इलेक्ट्रानिक्स में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और फिर सिविल सर्विस की तैयारी में जुट गए। पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में उनका चयन हुआ। चौधरी का विवाह डा. अदिति चौधरी से हुआ है जो कि शासकीय सेवा में हैं।

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