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Friday, February 6, 2026

रायगढ़ विधानसभा से अनिल अग्रवाल चीकू की दावेदारी मजबूत

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अनिल क्रिएटिव राजनीति से अपनी राह खुद बनाते

कांग्रेस संगठन में नीचे से लेकर ऊपर तक सभी मानते हैं उनकी राजनीति का लोहा

रायगढ़ / रायगढ़ में अनिल अग्रवाल चीकू किसी पहचान की मोहताज नहीं। वह हर समय एक जैसे ही रहते हैं फिर वह चुनाव हो, उसके पहले हो या फिर उसके बाद। वह सुलभ हैं और लोगों को सुनते हैं। लोगों के बीच हमेशा रहते हैं और समय-समय पर उनकी आवाज़ भी बन जाते हैं। उनसे हर रायगढ़िया जुड़ा हुआ है। कॉलेज संबंधित हर समस्या लेकर छात्र अभी भी उनसे सलाह और हस्तक्षेप की उम्मीद रखते हैं। भू-विस्थापितों के लिए हमेशा आंदोलन को तैयार चीकू ने इस बार रायगढ़ विधानसभा से अपनी उम्मीदवारी दर्ज कराई है।
अनिल चीकू कांग्रेस कमिटी के ऐसे नेता हैं जो अपनी राह खुद बनाना जानते हैं। उनकी लोकप्रियता कई दफे बड़े नेताओं को रास नहीं आती तो वो चीकू को साइड लगाने लग जाते हैं पर चीकू भी पॉलिटिक्स के ओल्ड स्कूल के छात्र हैं। हर बार वह नए और क्रिएटिव तरीके से कांग्रेस में अपनी पहचान बना लेते हैं जिसका प्रत्यक्ष प्रयास पं जवाहर लाल नेहरू मार्ग का रायगढ़ शहर के मध्य मे नामकरण भी रहा और इसी कारण पार्टी का एक वर्ग उनको इग्नोर चाह कर भी नहीं कर सकता।आमजन के करीब और मीडिया फ्रेंडली चीकू कांग्रेस पार्टी लाइन से कभी नहीं हटे भले ही कई दफे वह भीतरघात का शिकार हुए पर संयम नहीं खोया। शायद इसी कारण पार्टी के बड़े नेताओं में उनके प्रति सम्मान है।
अनिल अग्रवाल जिन्हें चीकू उपनाम से भी जाना जाता है। अनिल चीकू का नाम 2008 के बाद 2018के चुनाव में खूब उछला था उन्होंने काफी जोर-आजमाइश भी की पर दो अग्रवालों के चुनाव नामांकन भरने से ऐन वक़्त पर प्रकाश नायक को टिकट मिली। 5 साल अब वही स्थिति उत्पन्न हो गई है,फिर से चीकू के नाम पर चर्चा पार्टी के ही भीतर शुरू हो गई है।चीकू के नाम और दावेदारी को प्रदेश कांग्रेस कमेटी हल्के में नहीं ले रही वह उनके जनाधार को आंक रही। चीकू के पास चुनाव लड़ने के दमखम के साथ पूरी मशीनरी है और गोरतलब यह भी है कि चीकू लो प्रोफाइल और फक्कड़ प्रजाती के नेताओं मे से है।
यह जाहिर है कि अनिल चीकू जशपुर और सरगुजा में कांग्रेस संगठन की चुनावी डोर को बीते 20 साल से थामे हैं लैलूंगा विधानसभा मे भी विशेष दखल रखते है। युवाओं के साथ अनिल हमेशा खड़े रहते हैं। एनटीपीसी लारा में स्थानीय युवाओं के साथ प्रबंधन व प्रशासन के खिलाफ उनका संघर्ष लारा संघर्ष बना आंदोलन मे उन्होंने कई एफआईआर को झेला जीसमे जेल भी गये पर ईसके कारण कई युवाओं को नौकरी और मुआवजा मिला।
1986 से यानी 38 साल से चीकू कांग्रेस के विभिन्न संगठनों से जुड़े हुए हैं। करीब 4 दशक की इस राजनीतिक पारी में उनके बस्ते में कई चुनाव के अनुभव और समीकरण समाहित हैं। जननायक रामकुमार अग्रवाल के पोते अनिल अग्रवाल चीकू की पैठ राजधानी से लेकर दिल्ली तक है।इसी कारण रायगढ़ विधायक टिकट की रेस में इस बार अनिल चीकू सबसे पहले हैं।

बड़े नेताओं से करीबी


दावेदारों की फेहरिस्त में चीकू इसलिए आगे माने जाते हैं कि कांग्रेसी दिग्गज नेताओं से उनके अच्छे संबंध है और रायगढ़ के लिए किसी भी योजना में उनसे सलाह मशविरा लेते हैं।2 महीने पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में शामिल होने रायगढ़ 2 दफे आये दोनों ही बार अनिल चीकू उनके सबसे पास रहे। सत्यनारायण बाबा धाम भी गए। बीते साल भेंट वार्ता में मुख्यमंत्री जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे तो पहले 12सचिवों मे अनिल चीकू को सचिव भी बनाया था और चीकू ने अपने अध्यक्ष के हर कार्य को समय से पहले करके भी दिखया सो सीएम से इनकी करीबी किसी नहीं छिपी। इन सब के मद्देनजर इनकी दावेदारी को कांग्रेस कमिटी हल्के में नहीं ले रही क्योंकि कांग्रेस कमिटी में उनकी पहुंच नीचे से लेकर ऊपर तक है और वह सभी का आदर-सम्मान करते हैं।

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